चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के अधीन काम करने वाले कर्मचारियों के न्यूनतम वेतनमान से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने हरियाणा सरकार की ओर से दाखिल अपीलों को खारिज करते हुए एकल पीठ के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें पात्र कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान का लाभ देने के निर्देश दिए गए थे।

मामले की सुनवाई जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस मिंदरजीत यादव की खंडपीठ ने की। अदालत ने कहा कि मौजूदा मामले में कर्मचारियों की स्थिति वर्ष 2019 में सामने आए ‘वरुण गुप्ता बनाम हरियाणा सरकार’ मामले से अलग नहीं है। उस मामले में दिया गया फैसला पहले ही अंतिम रूप ले चुका है।

सरकार ने 2017 के निर्देशों का दिया हवाला

सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से 3 नवंबर 2017 को जारी सरकारी निर्देशों की व्याख्या को लेकर अपनी दलील रखी गई। सरकार का कहना था कि इन निर्देशों को सही तरीके से नहीं समझा गया और इसी आधार पर कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान का लाभ देने के आदेश पर सवाल उठाया गया।

हालांकि, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने पिछले ‘वरुण गुप्ता’ मामले में दिए गए फैसले और उसके बाद की न्यायिक कार्यवाही का भी उल्लेख किया।

वरुण गुप्ता केस को बनाया आधार

हाईकोर्ट ने कहा कि ‘वरुण गुप्ता बनाम हरियाणा सरकार’ मामले में सरकार की अपील के साथ पुनर्विचार याचिका भी खारिज हो चुकी है। ऐसे में समान परिस्थितियों वाले कर्मचारियों से जुड़े मामलों में उस फैसले के आधार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अदालत के मुताबिक जब समान स्थिति वाले मामले में फैसला अंतिम हो चुका है, तो वर्तमान मामले में भी उसी कानूनी आधार को लागू किया जाना चाहिए।

एकल पीठ के आदेश में दखल से इनकार

खंडपीठ ने मामले से संबंधित एकल पीठ के आदेशों को बरकरार रखा और हरियाणा सरकार की सभी संबंधित अपीलों को खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद न्यूनतम वेतनमान के लाभ की मांग कर रहे कर्मचारियों के पक्ष में पहले दिए गए आदेश पर फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है।

कर्मचारियों के लिए क्या मायने रखता है फैसला

हाईकोर्ट के इस फैसले का सीधा संबंध उन कर्मचारियों से है, जिनका मामला समान परिस्थितियों और न्यूनतम वेतनमान के लाभ से जुड़ा है। अदालत द्वारा सरकार की अपीलें खारिज किए जाने के बाद एकल पीठ के आदेश प्रभावी बने हुए हैं।

लंबे समय से इस लाभ की मांग कर रहे कर्मचारियों के लिए हाईकोर्ट का यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब संबंधित विभागों को अदालत के आदेश के मुताबिक आगे की प्रक्रिया करनी होगी।