चंडीगढ़। हरियाणा को देश के बड़े औद्योगिक केंद्रों में शामिल करने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार निवेश बढ़ाने पर जोर दे रही है। इस अभियान में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त और सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल की भूमिका अहम है। सरकार ने अगले 5 वर्षों में 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश लाने और 10 लाख रोजगार के अवसर तैयार करने का लक्ष्य रखा है। अब चुनौती निवेश से जुड़े प्रस्तावों को जमीन पर उतारने की है।

5 लाख करोड़ के निवेश पर सरकार का फोकस

हरियाणा सरकार ने 1 जून 2026 को मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति-2026 सहित 10 क्षेत्र आधारित नीतियां लागू की थीं। इनका मकसद प्रदेश में उद्योगों का विस्तार करना, निवेशकों को बेहतर सुविधाएं देना और रोजगार बढ़ाना है।

नीति के शुभारंभ के दौरान 1.10 लाख करोड़ रुपये के निवेश से जुड़े 123 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। वहीं, मुंबई में आयोजित निवेश रोड शो के दौरान 66,821 करोड़ रुपये के निवेश से संबंधित 17 समझौते हुए। हालांकि, इन प्रस्तावों का वास्तविक असर तभी दिखेगा, जब परियोजनाएं शुरू होंगी और लोगों को रोजगार मिलेगा।

विदेशों से निवेश लाने की तैयारी

हरियाणा सरकार विदेशी कंपनियों के साथ भी संपर्क बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की स्वीडन यात्रा के दौरान करीब 4,000 करोड़ रुपये के निवेश पर सहमति बनने की जानकारी दी गई। इससे 11,000 से अधिक रोजगार के अवसर बनने की संभावना जताई गई।

सिंगापुर यात्रा के दौरान भी करीब 5,500 करोड़ रुपये के निवेश से जुड़े प्रस्ताव सामने आए। इनमें स्वास्थ्य और वेलनेस क्षेत्र के लिए 3,000 करोड़ रुपये, जल प्रबंधन के लिए 1,500 करोड़ रुपये और शिक्षा क्षेत्र के लिए 1,000 करोड़ रुपये शामिल हैं।

सरकार का लक्ष्य इन प्रस्तावों को आगे बढ़ाकर औद्योगिक परियोजनाओं में बदलना है। अप्रैल 2027 में प्रस्तावित हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भी इसी दिशा में अहम माना जा रहा है।

छोटे उद्योगों और तकनीक पर भी जोर

प्रदेश की औद्योगिक योजना में बड़े उद्योगों के साथ छोटे कारोबार को भी महत्व दिया गया है। नई एमएसएमई नीति-2026 के तहत 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित करने और 5 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा हरियाणा के निर्यात को दोगुना करने की योजना है।

पंचकूला, करनाल, हिसार, सोनीपत और रोहतक जैसे शहरों में तकनीक आधारित कारोबार और वैश्विक क्षमता केंद्र विकसित करने की योजना भी है। इससे गुरुग्राम के अलावा दूसरे शहरों में भी रोजगार और कारोबार के नए अवसर तैयार हो सकते हैं।

एमबीबीएस के बाद चुनी प्रशासनिक सेवा

डॉ. अमित कुमार अग्रवाल की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी अलग रही है। उन्होंने जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा को अपना करियर बनाया।

वह राज्यपाल के सचिव, आबकारी एवं कराधान आयुक्त और शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक जैसे पदों पर काम कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने कई जिलों में उपायुक्त और अन्य प्रशासनिक पदों की जिम्मेदारी भी संभाली है।

अब निवेश को जमीन पर उतारने की चुनौती

हरियाणा के औद्योगिक विकास के लिए निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलना सबसे अहम होगा। इसके लिए जमीन की उपलब्धता, जरूरी मंजूरियों, बुनियादी सुविधाओं और उद्योगों की समस्याओं का समय पर समाधान करना होगा।

डॉ. अमित अग्रवाल के नेतृत्व में उद्योग विभाग की भूमिका इन कामों में महत्वपूर्ण रहेगी। सरकार के सामने अब यह साबित करने की चुनौती है कि निवेश के बड़े लक्ष्य प्रदेश में नए उद्योगों और स्थानीय युवाओं के लिए वास्तविक रोजगार में बदल सकें।

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