चंडीगढ़, 30 सितंबर। हरियाणा में पढ़ाई और रिसर्च तक सीमित रहने वाले नए विचारों को अब जमीन पर उतारने की तैयारी है। प्रदेश सरकार ने ऐसी योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी है, जिसके जरिए विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और विश्वविद्यालयों के नए आइडिया को वास्तविक समस्याओं के समाधान से जोड़ा जाएगा। उपयोगी तकनीक या समाधान का शुरुआती मॉडल तैयार करने के लिए सरकार सीड फंडिंग भी उपलब्ध कराएगी।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई हरियाणा स्टेट इनोवेशन सोसाइटी की पहली जनरल बॉडी बैठक में ‘हरियाणा नेटवर्क फॉर एकेडमिक विजन, अपलाइड क्रिएटिविटी एवं हॉलिस्टिक एडमिनिस्ट्रेटिव रिसर्च (नवाचार)’ योजना पर चर्चा हुई। बैठक में योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई।
योजना के तहत यदि किसी विद्यार्थी या शोधकर्ता के पास ऐसी नई तकनीक, अवधारणा या समाधान है, जो प्रदेश की किसी वास्तविक चुनौती को दूर करने में काम आ सकता है, तो उसे आगे विकसित करने का अवसर मिलेगा। प्रारंभिक मूल्यांकन में उपयुक्त पाए गए प्रस्तावों को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए 1 लाख रुपये तक की शुरुआती सीड फंडिंग दी जा सकेगी।
इसके बाद संबंधित विभाग के साथ समन्वय कर तैयार की गई DPR को परियोजना को जमीन पर लागू करने के लिए आवश्यक अंतिम वित्तीय स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। सरकार का मकसद शोध को केवल विश्वविद्यालयों और प्रयोगशालाओं तक सीमित रखने के बजाय उसे प्रशासन और आम लोगों के काम आने वाले समाधान में बदलना है।
मुख्यमंत्री ने शोध परियोजनाओं को ‘लैब से फील्ड और फील्ड से नीति’ की दिशा में आगे बढ़ाने पर जोर दिया। इसके तहत विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में विकसित तकनीक व ज्ञान का वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण किया जाएगा। सफल प्रयोगों को सरकारी योजनाओं और नीतियों में उपयोग किए जाने की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।
नवाचार योजना में विकसित हरियाणा@2047, सतत विकास लक्ष्य (SDGs), डिजिटल गवर्नेंस, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, टिकाऊ कृषि, शहरी प्रबंधन और सामाजिक-आर्थिक समावेशन जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता वाले विषयों में रखा गया है। प्रशासन की बदलती जरूरतों के अनुसार नए विषयों पर भी शोध परियोजनाएं ली जा सकेंगी।
पानी की गुणवत्ता पर पायलट प्रोजेक्ट की तैयारी
बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शोध संस्थानों और विशेषज्ञ संगठनों के साथ मिलकर किसी एक जिले में पायलट प्रोजेक्ट की संभावनाएं तलाशें। इसमें भूमिगत जल की गुणवत्ता से जुड़ी समस्याओं पर शोध करने के साथ ऐसी तकनीक विकसित करने की संभावना देखी जाएगी, जिससे अनुपयोगी या गैर-पीने योग्य पानी को उपयोगी बनाया जा सके। जरूरत पड़ने पर तकनीकी प्रक्रिया के जरिए उसे पीने योग्य बनाने के समाधान पर भी काम किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शोध का उद्देश्य केवल अकादमिक उपलब्धि हासिल करना नहीं, बल्कि समाज के सामने मौजूद वास्तविक समस्याओं का व्यावहारिक और टिकाऊ समाधान तलाशना होना चाहिए। इसके लिए सरकार, विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, तकनीकी संस्थानों और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
IIT दिल्ली समेत इन संस्थानों का मिलेगा सहयोग
बैठक में बताया गया कि हरियाणा राज्य इनोवेशन मिशन के तहत गूगल इंडिया, आईआईटी दिल्ली और एनआईटी कुरुक्षेत्र समेत कई विशेषज्ञ संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन किए गए हैं। इनके माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्टार्टअप मेंटरिंग, तकनीकी सहयोग और अन्य लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने की योजना है।
सरकार को उम्मीद है कि इन संस्थागत सहयोगों के जरिए प्रदेश में सामने आने वाले नए विचारों को केवल प्रोटोटाइप तक सीमित न रखकर व्यवहारिक समाधान के रूप में विकसित किया जा सकेगा। इससे शोध और नवाचार को राज्य की विकास प्राथमिकताओं से जोड़ने का रास्ता भी मजबूत होगा।
बैठक में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, युवा अधिकारिता एवं उद्यमिता विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव जी अनुपमा, उच्चतर शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एके सिंह, फ्यूचर विभाग की प्रधान सचिव अपनीत पी कुमार, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव अमित अग्रवाल समेत कई अधिकारी, सोसायटी के सदस्य और गैर सरकारी सदस्य मौजूद रहे।
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