कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा में प्राकृतिक खेती को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने की तैयारी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से कुरुक्षेत्र जिले में 2 हजार एकड़ क्षेत्र को क्लस्टर के रूप में विकसित कर स्मार्ट एग्रीकल्चर के तहत प्राकृतिक खेती शुरू की जाएगी। खास बात यह होगी कि इस प्रयोग के दौरान किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा तो उसकी भरपाई प्रदेश सरकार करेगी।
कृषि क्षेत्र में तकनीक और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं लागू किए जाने की जानकारी भी दी गई। प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत किसानों को सोलर पंप लगाने पर 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। सरकार के अनुसार प्रदेश में अब तक 1 लाख 95 हजार 653 सोलर पंप स्थापित किए जा चुके हैं।
फसल अवशेष प्रबंधन के क्षेत्र में भी किसानों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। व्यक्तिगत किसानों को कृषि अवशेष प्रबंधन से जुड़े उपकरण खरीदने पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी गई है, जबकि कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने पर 80 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है। अब तक 1 लाख 11 हजार से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन उपकरण किसानों तक पहुंचाए गए हैं और 6,794 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं। इन योजनाओं के तहत करीब 1,017 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई है।
पराली प्रबंधन को प्रोत्साहित करने के लिए गांठ बनाने और उचित तरीके से अवशेष संभालने वाले किसानों के लिए 1,200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया गया है। सरकार के मुताबिक करीब 10 लाख किसानों को अब तक 909 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी जा चुकी है।
सब्जी और फल उत्पादकों के लिए भावांतर भरपाई योजना के तहत 21 बागवानी फसलों के संरक्षित मूल्य तय किए गए हैं। योजना के माध्यम से अब तक करीब 46 हजार किसानों को 247 करोड़ रुपये की भावांतर राशि दिए जाने की जानकारी दी गई।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि कृषि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला है और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर रही है। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से फसल विविधीकरण के साथ किसानों तक नई तकनीक और जरूरी सुविधाएं पहुंचाने पर जोर दिया। उनका कहना था कि खेती के साथ मिट्टी, पानी और पर्यावरण का संरक्षण भी किसानों की प्राथमिकता में होना चाहिए।
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज ने कपास की खेती में विविधीकरण और उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने देसी कपास के रकबे को बढ़ाने की जरूरत बताते हुए विश्वविद्यालय की विकसित एचएयू बीटी-12 और एचएयू बीटी-13 किस्मों का उल्लेख किया। उनके अनुसार रेतीली जमीन में ड्रिप सिंचाई के साथ फर्टिगेशन अपनाने से पानी और उर्वरक का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। कपास के साथ मूंग की अंत:फसल लेकर किसान अतिरिक्त आमदनी भी हासिल कर सकते हैं।
विश्वविद्यालय की ओर से सरसों, मूंग और बाजरा समेत दूसरी फसलों की उन्नत किस्मों और तकनीकों पर भी काम किया जा रहा है। सरसों की नई हाइब्रिड किस्म 2101 को किसानों तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय हर साल करीब 25 हजार क्विंटल प्रमाणित बीज किसानों को उपलब्ध कराता है। दूर-दराज के किसानों की सुविधा के लिए बीज की ऑनलाइन बुकिंग शुरू करने की तैयारी भी चल रही है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे 45 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया। इनमें प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण, फसल अवशेष प्रबंधन, मशरूम उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, मधुमक्खी पालन और केंचुआ खाद जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले 30 पुरुष और 15 महिला किसान शामिल रहे।
इस मौके पर चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय परिसर में करीब 9.94 करोड़ रुपये की लागत से तैयार दीनदयाल उपाध्याय जैविक खेती उत्कृष्टता केंद्र का भी उद्घाटन किया गया। केंद्र के जरिए किसानों को जैविक खेती की तकनीक, अनुसंधान और प्रशिक्षण से जोड़ने की योजना है। सरकार का कहना है कि इससे रसायन-मुक्त खेती, मिट्टी की उर्वरता और गुणवत्तापूर्ण जैविक उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
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