संजीव, सोनीपत। न दिन देखते हैं, न रात देखते हैं, रक्तदान करने वाले रक्त की बाट देखते हैं।’ मानवता की सेवा और जीवनरक्षा के इस संकल्प को हरियाणा पुलिस के एक अधिकारी ने जमीनी स्तर पर चरितार्थ कर दिखाया है। हरियाणा राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के जागरूकता कार्यक्रम एवं पुनर्वास प्रभारी और सब-इस्पेक्टर डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने एक बार फिर आपातकाल में गंभीर रूप से बीमार युवक के लिए प्लेटलेट्स दान किए हैं। इसके साथ ही उन्होंने अपने जीवन में 91वीं बार प्लेटलेट्स दान करने का गौरव हासिल किया है।
186 बार रक्तदान और एक बार प्लाज्मा दान का रिकॉर्ड
खाकी वर्दी में जनसेवा का दायित्व निभाने वाले डॉ. अशोक कुमार वर्मा के लिए मानवता की सेवा केवल कोई नौकरी या औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके जीवन का सबसे बड़ा संकल्प है। वे अब तक अपने जीवन में कुल 186 बार रक्तदान और एक बार प्लाज्मा दान कर चुके हैं। जब भी किसी जरूरतमंद अस्पताल या परिवार से रक्त अथवा प्लेटलेट्स की मांग आती है, वे बिना समय गंवाए सहायता के लिए सबसे आगे खड़े मिलते हैं। उनका मानना है कि किसी जरूरतमंद को समय पर रक्त उपलब्ध कराना उसके पूरे परिवार के लिए निराशा के अंधेरे में आशा की एक नई किरण साबित होता है।
क्यों जरूरी है प्लेटलेट्स दान?
विशेषज्ञों के अनुसार, प्लेटलेट्स रक्त का एक बेहद महत्वपूर्ण घटक है जो शरीर में रक्तस्राव को रोकने में मुख्य भूमिका निभाता है। कई गंभीर बीमारियों और विशेष चिकित्सकीय ऑपरेशनों के दौरान डॉक्टरों द्वारा मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ाने की सलाह दी जाती है। ऐसे नाजुक समय पर समय पर प्लेटलेट्स मिलना मरीज की जान बचा सकता है। प्लेटलेट्स डोनेशन की प्रक्रिया सामान्य रक्तदान से थोड़ी अलग होती है। इसमें एक विशेष मशीन (सेल सेपरेटर) की मदद से रक्त से केवल प्लेटलेट्स अलग किए जाते हैं और शेष रक्त वापस दाता के शरीर में पहुंचा दिया जाता है। इस प्रक्रिया में सामान्य रक्तदान से डेढ़ घंटा अधिक समय लगता है और पूरी मेडिकल जांच के बाद ही यह संभव होता है।
616 शिविर लगाकर 68 हजार लोगों की मदद
डॉ. अशोक कुमार वर्मा लंबे समय से पुलिस सेवा के साथ-साथ समाजसेवा के इस महाअभियान से जुड़े हुए हैं। वे अब तक कुल 616 स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित कर चुके हैं, जिनके माध्यम से सरकारी रक्त कोषों को 22,037 यूनिट रक्त प्राप्त हुआ है। उनके इस प्रेरणादायक प्रयासों से अब तक लगभग 68,000 लोग रक्त सेवा का लाभ उठा चुके हैं। डॉ. वर्मा का संदेश है कि स्वस्थ शरीर वाले हर पात्र व्यक्ति को आगे आकर स्वैच्छिक रक्तदान करना चाहिए, क्योंकि रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प आज तक नहीं बना है। खाकी का यह मानवीय स्वरूप समाज को यह गहरा संदेश देता है कि असली वर्दी का सम्मान कर्तव्य से तो बढ़ता ही है, साथ ही किसी की जान बचाने से मानवता का मान भी बढ़ता है।
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