दिल्ली में यमुना नदी की स्थिति एक बार फिर चिंता का विषय बन गई है। उत्तर दिल्ली के बुराड़ी के पास यमुना नदी के किनारे सैकड़ों मछलियां मृत पाई गई हैं। ‘न्यू दिल्ली नेचर सोसाइटी’ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर गुरुवार (15 अक्टूबर) को इसकी जानकारी दी। यमुना नदी के किनारे मछलियों के मृत मिलने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। उस समय स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि हरियाणा की नहरों के जरिए बहकर आ रहे रासायनिक कचरे के कारण मछलियों की मौत हो रही है। हालांकि, बुराड़ी के पास मछलियों की मौत की मौजूदा घटना के पीछे की वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

यमुना के पानी की गुणवत्ता पर फिर सवाल

यमुना किनारे बड़ी संख्या में मछलियों के मृत मिलने से नदी के पानी की गुणवत्ता और जलीय जीवों पर प्रदूषण के प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ गई है। घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पानी के नमूनों की जांच और संबंधित विभागों की ओर से पड़ताल जरूरी होगी।

रासायनिक कचरा या एसिड रेन बनी मछलियों की मौत की वजह?

‘न्यू दिल्ली नेचर सोसाइटी’ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर यमुना में मछलियों की मौत की जानकारी दी। सोसाइटी के मुताबिक, 14 अक्टूबर को दिल्ली के बुराड़ी के पास यमुना नदी में सैकड़ों, संभवतः हजारों मछलियां मृत पाई गईं। हालांकि, उनकी मौत की सटीक वजह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। सोसाइटी ने अपनी पोस्ट में लिखा, “स्थानीय लोगों का आरोप है कि हरियाणा से नहरों के जरिए रासायनिक कचरा बहाया गया है। क्या इसका संबंध 12 अक्टूबर को हुई एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से हो सकता है?”

पानी में ऑक्सीजन की कमी या जहरीले पदार्थों की मौजूदगी?

सोसाइटी के अनुसार, बड़ी संख्या में मछलियों का मृत मिलना नदी में पारिस्थितिक तनाव का संकेत हो सकता है। पानी की गुणवत्ता खराब होने, घुलित ऑक्सीजन का स्तर कम होने और जहरीले पदार्थों की मौजूदगी जैसे कारक जलीय जीवों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। हालांकि, फिलहाल यह पुष्टि नहीं हुई है कि बुराड़ी में मछलियों की मौत रासायनिक कचरे, अम्लीय वर्षा या किसी अन्य वजह से हुई है। इसके लिए पानी की गुणवत्ता और अन्य संभावित कारणों की वैज्ञानिक जांच जरूरी है।

यमुना में प्रदूषण को लेकर फिर बढ़ी चिंता

यमुना में मछलियों के मृत मिलने की तस्वीरें ऐसे समय सामने आई हैं, जब नदी के प्रदूषण को लेकर पहले से ही चिंताएं बनी हुई हैं। नदी की सफाई के लिए कई प्रयास किए जाने के बावजूद प्रदूषण एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। बुराड़ी की इस घटना ने एक बार फिर यमुना के पानी की गुणवत्ता और जलीय पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। अब मछलियों की मौत के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए जांच के नतीजों का इंतजार है।

पिछले साल भी बुराड़ी में हुई थी सैकड़ों मछलियों की मौत

यमुना नदी में मछलियों के मृत मिलने की ऐसी घटना पहले भी सामने आ चुकी है। पिछले साल मई में दिल्ली के बुराड़ी के पास बड़ी संख्या में मछलियों की मौत हुई थी। उस समय सामने आई तस्वीरों में हजारों मृत मछलियां नदी में तैरती दिखाई दी थीं। स्थानीय लोगों ने तब भी इसके पीछे हरियाणा से छोड़े गए रासायनिक कचरे को जिम्मेदार ठहराया था। उस समय की रिपोर्टों में यमुना में प्रदूषण का स्तर काफी अधिक होने की बात भी सामने आई थी।

संजय झील में भी मरी थीं सैकड़ों मछलियां

इस साल मई में पूर्वी दिल्ली की संजय झील में भी सैकड़ों मछलियों की मौत हुई थी। उस समय भीषण गर्मी और झील में पानी का स्तर कम होने को इसकी संभावित वजह बताया गया था। विशेषज्ञों के मुताबिक, पानी का तापमान बढ़ने, प्रदूषक तत्वों की अधिक सांद्रता और घुलित ऑक्सीजन का स्तर घटने से मछलियों के जीवित रहने की परिस्थितियां प्रभावित हो सकती हैं।

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