Automobile desk: अक्सर गाड़ी मालिकों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि आखिर अचानक उनकी कार का माइलेज इतना कम क्यों हो गया। कई लोग ईंधन की गुणवत्ता को इसके लिए जिम्मेदार मानते हैं, तो कुछ तुरंत सर्विस सेंटर का रुख कर लेते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि माइलेज में गिरावट के पीछे कई बार बहुत छोटी-छोटी तकनीकी या व्यावहारिक वजहें छिपी होती हैं, जिन्हें कोई भी आम इंसान आसानी से समझ सकता है और घर पर ही चेक कर सकता है। अगर आपकी गाड़ी भी हाल ही में पहले के मुकाबले ज्यादा पेट्रोल या डीजल पीने लगी है, तो मैकेनिक के पास जाने से पहले इन अहम बिंदुओं की पड़ताल जरूर कर लें।

1. टायरों में हवा का कम दबाव
गाड़ी के टायर वाहन की चाल और ईंधन की खपत पर सीधा असर डालते हैं। यदि टायरों में तय मानक से कम हवा है, तो इंजन को गाड़ी आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त जोर लगाना पड़ता है। इससे ईंधन की खपत तेजी से बढ़ती है। कई बार ऐसा होने पर स्टीयरिंग भी थोड़ा भारी महसूस होता है या फिर एक्सीलरेटर से पैर हटाने के बाद भी गाड़ी उतनी आसानी से आगे नहीं बढ़ती जितनी सामान्य स्थिति में बढ़ती है। इसलिए सबसे पहले चारों टायरों का प्रेशर चेक करना चाहिए। हमेशा ध्यान रखें कि टायर ठंडे होने पर ही हवा भरवाएं और वाहन निर्माता कंपनी द्वारा सुझाए गए PSI का ही पालन करें। टायर के साइड वॉल पर लिखा मैक्सिमम प्रेशर हमेशा सही पैमाना नहीं होता है।
2. एयर फिल्टर में गंदगी जमा होना
इंजन को सुचारू रूप से काम करने के लिए शुद्ध हवा की बहुत जरूरत होती है। एयर फिल्टर का मुख्य काम धूल, मिट्टी और बाहरी कणों को इंजन के भीतर जाने से रोकना है। लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद इसमें काफी कचरा और गंदगी जमा हो जाती है, जिससे हवा का रास्ता अवरुद्ध हो जाता है। हवा पूरी मात्रा में न मिलने पर इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और एक्सीलरेटर दबाने पर गाड़ी थोड़ी सुस्त या भारी महसूस होने लगती है। यदि माइलेज घटने के साथ पिकअप में भी कमी आ रही है, तो एयर फिल्टर की स्थिति तुरंत जांचनी चाहिए।
3. स्पार्क प्लग की स्थिति में खराबी
पेट्रोल गाड़ियों में इंजन के भीतर ईंधन को सही समय पर प्रज्वलित करने का काम स्पार्क प्लग करते हैं। समय बीतने के साथ और लगातार इस्तेमाल से ये प्लग घिस जाते हैं या उन पर कार्बन जम जाता है। परिणाम यह होता है कि ईंधन पूरी तरह जल नहीं पाता और बर्बादी बढ़ जाती है। यदि गाड़ी स्टार्ट होने के बाद भी स्मूथ नहीं चल रही, रफ्तार पकड़ते वक्त हिचकिचाहट महसूस हो रही है या इंजन में अजीब सा कंपन हो रहा है, तो स्पार्क प्लग की जांच बेहद जरूरी है। वाहन के मैनुअल के मुताबिक तय समय पर इन्हें बदल देना समझदारी होती है।
4. ब्रेक का पूरी तरह फ्री न होना
कई बार ड्राइविंग के दौरान ब्रेक पैडल से पैर हटाने के बावजूद ब्रेक पूरी तरह रिलीज नहीं हो पाते हैं। ऐसी स्थिति में पहियों पर हल्का सा खिंचाव या दबाव हमेशा बना रहता है, जिससे इंजन को सामान्य से ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है। यदि गाड़ी चलाते समय वह भारी महसूस हो रही है, किसी एक दिशा में खिंच रही है या सफर के बाद टायर्स के पास से हल्की जलने जैसी अजीब गंध आ रही है, तो समझ जाइए कि ब्रेक में कोई फॉल्ट है। किसी एक पहिए का असामान्य रूप से गर्म होना भी इसी ओर इशारा करता है।
5. इंजन का तापमान और कूलिंग सिस्टम
गाड़ी के इंजन को एक निश्चित और सही तापमान पर काम करना जरूरी होता है। यदि कूलेंट टेम्परेचर सेंसर या थर्मोस्टेट में किसी तरह की तकनीकी खराबी आ जाए, तो इंजन को अपनी सही कार्यशील स्थिति में आने में लंबा वक्त लगता है, जो सीधे तौर पर फ्यूल इकॉनमी पर भारी पड़ता है। यदि डैशबोर्ड पर तापमान मीटर सामान्य से काफी नीचे दिखाई दे रहा है या कार का हीटर केबिन को गर्म करने में ज्यादा समय ले रहा है, तो कूलिंग सिस्टम की जांच कराना आवश्यक हो जाता है।
6. ड्राइविंग का तरीका और ट्रैफिक कंडीशंस
हर बार माइलेज घटने की वजह गाड़ी के भीतर कोई अंदरूनी तकनीकी खराबी ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। कई बार हमारी अपनी ड्राइविंग आदतें और रूट भी इसके लिए जिम्मेदार होते हैं। यदि आप गाड़ी को लंबी देर तक आइडलिंग पर यानी एसी और इंजन चालू करके किसी जगह खड़े रखते हैं, तो बिना एक इंच चले भी ईंधन की खपत होती रहती है। इसके अलावा, बहुत छोटी दूरियां तय करने पर इंजन अपने आदर्श तापमान तक पहुंच ही नहीं पाता। भारी ट्रैफिक के बीच बार-बार क्लच-ब्रेक का इस्तेमाल और लगातार गियर बदलना भी माइलेज बिगाड़ने में अहम भूमिका निभाता है। यदि हाल ही में आपका रूट बदला है या गाड़ी का इस्तेमाल करने का पैटर्न बदला है, तो असल वजह यही हो सकती है।

