पारलाखेमुंडी: चक्रवाती तूफान ‘अर्णव’ के प्रभाव से हो रही मूसलाधार बारिश ने ओडिशा के गजपति जिले में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। जिले की प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने से कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन (लैंडस्लाइड) के कारण यातायात पूरी तरह प्रभावित हुआ है।
काशीनगर में वंशधारा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। जहां खतरे का निशान 54.60 मीटर है, वहीं नदी वर्तमान में 55.60 मीटर पर बह रही है। नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में स्थित गोटा बैराज (Gotta Barrage) के सभी 22 गेटों को खोल दिया गया है और 48,576 क्यूसेक बाढ़ का पानी छोड़ा जा रहा है।

दूसरी ओर, जिले की एक अन्य प्रमुख नदी महेंद्रतनया भी उफान पर है। इसके जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से गोसाणी ब्लॉक का बाघशाला गांव जलमग्न हो गया है। पानी का स्तर जिस गति से बढ़ रहा है, उससे पारलाखेमुंडी शहर में भी बाढ़ का पानी घुसने का खतरा मंडराने लगा है।
पिछले तीन दिनों से जारी लगातार बारिश के कारण नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है, जिससे कई मार्ग जलमग्न हो गए हैं। काईपुर-गंगाबड़ा मुख्य मार्ग पर एक बड़ा भूस्खलन हुआ है। पहाड़ी का हिस्सा ढहने से लगभग 50 मीटर तक सड़क कीचड़ और मलबे (चट्टानों) से ढक गई है। इसके चलते इलाके का संपर्क पूरी तरह कट गया है और यात्री रास्ते में फंसे हुए हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है। ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से पानी के बहाव और नदियों के जलस्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। आपदा प्रबंधन टीमों को निचले इलाकों में तैनात किया गया है और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश जारी किए गए हैं।
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