अभय मिश्रा, मऊगंज। जिस आयुष्मान आरोग्य मंदिर को ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य की संजीवनी होना चाहिए था, वही बुनियादी सुविधाओं के अभाव में खुद बीमार नजर आए, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। मऊगंज जिले के नईगढ़ी जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत पूर्वा में एक ऐसा स्वास्थ्य केंद्र सामने आया है, जो सड़क से 100 मीटर दूर धान के खेतों के बीच खड़ा है। यहां पहुँचने के लिए न कोई रास्ता है, न बिजली-पानी की व्यवस्था, और न ही डॉक्टरों की नियमित मौजूदगी का भरोसा। सवाल है कि भवन तो खड़ा कर दिया गया, लेकिन मरीजों के पहुँचने का रास्ता कौन बनाएगा?
मऊगंज जिले के ग्राम पंचायत पूर्वा स्थित आयुष्मान आरोग्य केंद्र कागजों में ग्रामीणों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ देने के लिए है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही दास्तान बयां करती है। सड़क से करीब 100 मीटर दूर खेतों के बीच बने इस केंद्र तक पहुँचने के लिए टीम को धान के खेत और कीचड़ भरी पगडंडियों से होकर गुजरना पड़ा। अस्पताल के मुख्य दरवाजे के सामने निजी जमीन पर धान की फसल लहलहा रही है।
ग्रामीण हेमराज शर्मा का सीधा आरोप है कि यह अस्पताल नियमित रूप से खुलता ही नहीं है। यहाँ सिर्फ डॉक्टर प्रियंका वर्मा कभी-कभार एक घंटे के लिए आती हैं, खानापूर्ति करती हैं और चली जाती हैं। हालात यह हैं कि मरीजों को अस्पताल से पहले बाहर ही अपनी चप्पलें उतारनी पड़ती हैं, और अगर किसी की तबीयत ज्यादा बिगड़ जाए, तो मजबूरी में बाहर इलाज के लिए जाना पड़ता है। बारिश के दिनों में जब खेतों में पानी भर जाता है, तो गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और बीमार मरीज रास्ता न होने की वजह से इलाज के लिए नहीं पहुंच पाते है।
यही नहीं, जनपद पंचायत नईगढ़ी की अध्यक्ष ममता तिवारी के पति कुंजबिहारी तिवारी ने भी डॉक्टरों के नदारद रहने पर बड़ा सवाल उठाया है। जब NEWS24 MP-CG और लल्लूराम डॉट कॉम की टीम दोपहर 11.30 बजे आरोग्य केंद्र पहुंची, तो वहाँ कोई भी डॉक्टर या स्टाफ मौजूद नहीं था। ग्रामीणों ने बताया कि डॉक्टर कभी-कभार सिर्फ 10 मिनट के लिए आती हैं, या फिर टीकाकरण के दिन ही कुछ ज्यादा देर रुकती हैं।
जब इस बदहाली पर ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) से पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उनके दो अलग-अलग बयानों ने प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल दी। पहले उन्होंने बेपरवाही से कहा कि पूर्वा का अस्पताल अभी बना नहीं है, इसलिए चालू नहीं है। लेकिन जब मौके की वास्तविक स्थिति बताई गई, तो वे पलटी मारते हुए बोले कि अस्पताल चालू है, वहाँ सीएचओ और एएनएम,आशा कार्यकर्ता पदस्थ हैं।
बीएमओ ने बगल के घर की ओर से रास्ता होने का दावा किया, लेकिन हकीकत यह है कि वह रास्ता किसी निजी व्यक्ति के घर का है, न कि अस्पताल का कोई सार्वजनिक एप्रोच रोड! कागजों में प्रशासन भले ही जीवन रक्षक दवाएं और प्राथमिक उपचार की किट मुहैया कराने के दावे करती हो, लेकिन पूर्वा के इस अस्पताल की हकीकत इन दावों की धज्जियां उड़ा रही है।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m

