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चंडीगढ़। पंजाब औैर हरियाणा उच्च न्यायालय ने शिरोमणि अकाली दल (शिअद) बिक्रम सिंह मजीठिया को मादक पदार्थ तस्करी मामले में राहत देते हुए पुलिस को उन्हें 3 दिनों तक गिरफ्तार नहीं करने का आदेश दिया है. वह शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल के साले हैं और मजीठा से चुनाव लड़ रहे हैं. इसके साथ ही वह अपनी अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं.

अकाली नेता और सुखबीर सिंह बादल के बहनोई मजीठिया की गिरफ्तारी के लिए जगह-जगह दबिश, स्थानीय पुलिस को भी ऑपरेशन की सूचना नहीं

 

न्यायमूर्ति लिसा गिल ने कहा कि उन्हें यह सुरक्षा केवल तीन दिनों के लिए होगी और अदालत को उनके प्रार्थना पत्र के अनुसार एक सप्ताह का समय देने का कोई आधार नजर नहीं आता है. इससे पहले दिन में पंजाब पुलिस की एक टीम ने सोमवार को उच्च न्यायालय द्वारा अंतरिम अग्रिम जमानत खारिज करने के बाद अमृतसर में मजीठिया के आवास पर छापा मारा था. गौरतलब है कि 20 दिसंबर को दर्ज नारकोटिकस ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत एक मामले में मोहाली की एक अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने के बाद मजीठिया ने उच्च न्यायालय का रुख किया था.

ड्रग मामले में अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

 

पंजाब पुलिस की अपराध शाखा द्वारा मोहाली पुलिस स्टेशन में दर्ज 49 पन्नों की प्राथमिकी में शिअद नेता पर एनडीपीएस अधिनियम की धारा 25, 27ए और 29 के तहत मामला दर्ज किया गया है. मजीठिया के मामले की पैरवी वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने की, जबकि पंजाब सरकार के मामले की पैरवी पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने की है. याचिका में कहा गया है कि यह स्पष्ट है कि वर्तमान प्राथमिकी याचिकाकर्ता के खिलाफ आगामी चुनावों पर नजर रखते हुए दर्ज की गई है और याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकार दांव पर हैं.

 

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