कुमार इंदर, जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) ने 23 वर्षों से प्रतिनियुक्ति पर सहायक यंत्री का पद संभाल रहे एक हेडमास्टर को बड़ा झटका दिया है। जबलपुर कलेक्टर द्वारा प्रतिनियुक्ति निरस्त किए जाने के फैसले को सही ठहराते हुए हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता हेडमास्टर पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया है कि संबंधित विभाग यदि चाहे तो हेडमास्टर के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर सकता है।
यह है पूरा मामला?
मामला हेडमास्टर ओमप्रकाश सिंह से जुड़ा हुआ है। ओमप्रकाश सिंह वर्ष 1993 में शिक्षक के पद पर नियुक्त हुए थे और वर्ष 2003 में पदोन्नत होकर हेडमास्टर (प्रधान पाठक) बने। उनके पास सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री थी, जिसके आधार पर उन्हें प्रतिनियुक्ति पर उपयंत्री और बाद में प्रभारी सहायक यंत्री का प्रभार दिया गया था। वह पिछले 23 सालों से लगातार प्रतिनियुक्ति पर ही काम कर रहे थे।
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कलेक्टर की कार्रवाई के खिलाफ पहुंचे थे कोर्ट
जबलपुर कलेक्टर ने प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत 28 अप्रैल को ओमप्रकाश सिंह की वर्षों पुरानी प्रतिनियुक्ति निरस्त कर दी थी और उन्हें उनके मूल विभाग में वापस भेजने के आदेश जारी किए थे। कलेक्टर के इस आदेश को चुनौती देते हुए ओमप्रकाश सिंह ने हाई कोर्ट की शरण ली थी।
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हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ ने याचिकाकर्ता की अपील को पूरी तरह से खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि लंबे समय तक प्रतिनियुक्ति पर रहना कोई स्थायी अधिकार नहीं बन जाता और कलेक्टर द्वारा प्रतिनियुक्ति निरस्त करने का फैसला पूरी तरह न्यायसंगत है। अदालत ने गैर-जरूरी याचिका लगाने पर याचिकाकर्ता हेडमास्टर पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाने के साथ-साथ विभाग को उनके खिलाफ नियमानुसार विभागीय जांच (Departmental Inquiry) करने की भी छूट दी है।
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