उज्जैन में सूर्य अर्घ्य के साथ हिंदू नववर्ष का स्वागत
प्रदीप मालवीय, उज्जैन। हिंदू नववर्ष के अवसर पर मां क्षिप्रा के पावन घाट पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से विक्रम संवत 2083 का शुभारंभ हुआ, जिसके तहत श्रद्धालुओं ने उगते सूर्य को जल अर्घ्य अर्पित कर नवसंवत्सर का स्वागत किया।
सनातन परंपरा के अनुसार आयोजित इस कार्यक्रम में मातृशक्ति ने शंखध्वनि के बीच गुड़ी सजाई और पुष्प, चंदन, इत्र व मां क्षिप्रा के पवित्र जल से नववर्ष का अभिनंदन किया। पूरे घाट क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालु सुख-समृद्धि की कामना करते नजर आए। विद्वानों ने बताया कि विक्रम संवत भारतीय संस्कृति की प्राचीन परंपरा का प्रतीक है और इसका आरंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होता है। यह दिन सृष्टि और नए कल्प के आरंभ का भी प्रतीक माना जाता है, जो भारतीय संस्कृति की प्राचीनता को दर्शाता है।

नरसिंहपुर में मां त्रिपुर सुंदरी का फूलों से श्रृंगार
दीपक कौरव, नरसिंहपुर। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन नरसिंहपुर के राजराजेश्वरी मां त्रिपुर सुंदरी का फूलों से श्रृंगार हुआ। मां त्रिपुर सुंदरी शंकराचार्य की तप स्थली झोंतेश्वर में अपनी सेना चौसठ योगनियों के साथ विराजी हैं। जहा वर्ष के प्रथम दिवस पर आरती का भक्ति मय नजारा दिखने को मिला। कहा जाता है कि मां त्रिपुर सुंदरी की आराधना भोग और मोक्ष दोनों का फल देती है।

शहडोल के अंतरा की कंकाली माता
अजयारविंद नामदेव, शहडोल। जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित अंतरा गांव कंकाली माता मंदिर में ‘मां’ कंकाल स्वरूप में विराजमान हैं। 10वीं-11वीं शताब्दी की कलचुरी कालीन यह प्रतिमा अपने आप में दुर्लभ मानी जाती है। मान्यता है कि यह स्वरूप शक्ति और साधना का प्रतीक है, जो इस मंदिर को साधकों के लिए भी विशेष बनाता है। लेकिन कंकाली माता मंदिर की सबसे खास पहचान है। एक श्रीफल और लाल कपड़े में बंधी मन्नतों की परंपरा, मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही चारों ओर लाल कपड़ों में बंधे श्रीफल नजर आते हैं। यह कोई सामान्य दृश्य नहीं, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास की जीवंत तस्वीर है।

सीहोर के मरीह माता मंदिर में विशेष पूजा अनुष्ठान
अनुराग शर्मा, सीहोर। सीहोर जिले के विश्राम घाट में माता चौसट योगिनी मरीह माता मंदिर में नौ दिवसीय दिव्य यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। मंदिर में नवरात्रि के दिनों में हर साल इस तरह का आयोजन किया जाता है। जानकारों के मुताबिक करीब 250 सालों से मरही माता मंदिर में नवरात्रि के दिनों में भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। बीते वर्ष की तरह इस साल भी 27 मार्च को मंदिर में भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इससे पहले दुर्गा अष्टमी के दिन रात के 12 बजे निशा आरती की जाएगी। किसी महिलाओं को बच्चे नहीं होते हैं वह महिलाएं उल्टा स्वास्तिक बनती है जब बच्चे हो जाते हैं तब उसे स्वास्तिक को सिद्ध किया जाता है। गुरुवार को श्रद्धालुओं ने मंदिर में कन्याओं का पूजन किया और उनको चुनरी अर्पित।

धार में सूर्यदेव को अर्घ्य
रेणु अग्रवाल, धार। चैत्र प्रतिपदा नववर्ष गुड़ी पड़वा के अवसर पर धार के किले के प्राचीर से सूर्यदेव को अर्घ्य देकर नववर्ष का शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम प्रतिवर्ष महाराजा भोज फाउंडेशन की ओर से आयोजित किया जाता है। जिसमें शहरवासी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। लोग शंख-घंटे की ध्वनि के साथ सूर्य की पहली किरण को अर्घ्य देकर नववर्ष का शुभारंभ करते हैंय़ वहीं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए तुलसी का पौधा वितरण किया जाता है।

शाजापुर के मां राजराजेश्वरी माता मंदिर में उत्साह
मोहित भावसार, शाजापुर। जिले को अपनी पहचान दिलाने वाली मां राजराजेश्वरी माता मंदिर में भक्तों का उत्साह और जमावड़ा सुबह से ही देखने को मिला। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां के दरबार में कलेक्टर ऋजू बाफना, पुलिस अधीक्षक यशपाल सिंह राजपूत, क्षेत्रीय विधायक अरुण भीमावद की मौजूदगी में घट स्थापना के साथ पर्व की शुरुआत की गई। चैत्र नवरात्रि के दौरान शाजापुर में आज से 15 दिवसीय मेले की भी शुरुआत हो चुकी हैं।

बुधनी के देवी धाम में घट-ज्योत स्थापना के साथ भक्ति का माहौल
मुकेश मेहता, बुधनी। मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां विजयासन देवी मंदिर सलकनपुर में चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व आज से श्रद्धा और भक्ति के माहौल में शुरू हो गया। सुबह 10:47 बजे शुभ मुहूर्त में विधि-विधान के साथ घट स्थापना और ज्योति स्थापना की गई। बुधनी विधानसभा क्षेत्र में स्थित यह दिव्य धाम हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहता है।

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