चंडीगढ़। हरियाणा के हिसार में करीब ढाई साल के बच्चे की हत्या के मामले में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। जिस हेम राज को निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी, उसे पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बरी कर दिया है। अदालत ने जांच में गंभीर खामियां पाईं। अभियोजन पक्ष ऐसे ठोस और स्वीकार्य सबूत पेश नहीं कर सका, जिनसे हेम राज का अपराध संदेह से परे साबित होता।

मौत की सजा से बरी होने तक पहुंचे इस मामले में हाई कोर्ट ने जांच पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत के सामने आरोपी की पहचान से जुड़ा एक अहम तथ्य आया। चाइल्डलाइन के पुराने रिकॉर्ड में बच्चे को पीटने वाले व्यक्ति का नाम ‘महाबीर’ दर्ज था। जबकि पुलिस ने बाद में हेम राज को आरोपी बनाया। अदालत के अनुसार, जांच एजेंसी ने यह पता लगाने की गंभीर कोशिश नहीं की कि महाबीर कौन था और उसका हेम राज से क्या संबंध था।

खेत में मिला था मासूम का सिर कटा शव

यह मामला 16 जून 2018 को सामने आया था। हिसार के गैबीपुर गांव में एक बंजर खेत से करीब ढाई साल के बच्चे का सिर कटा शव बरामद हुआ था। घटनास्थल पर खोपड़ी, हड्डियों के टुकड़े और खून से सने कपड़े भी मिले थे। इस घटना के बाद बरवाला थाने में हत्या और सबूत मिटाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया।

बच्चे की मां ने 19 जून 2018 को न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया था। उसने आरोप लगाया कि हेम राज ने 13 जून की रात बच्चे को सड़क पर पटककर और कुदाल से पीटकर मार डाला था। पुलिस ने 20 जून को हेम राज को गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसी का दावा था कि उसकी निशानदेही पर बच्चे के कपड़े और घटनास्थल के पास पड़ी कुदाल के बारे में जानकारी मिली थी।

चाइल्डलाइन के रिकॉर्ड ने खड़े किए सवाल

हाई कोर्ट ने मामले की जांच में चाइल्डलाइन के रिकॉर्ड को अहम माना। यह रिकॉर्ड बच्चे का शव मिलने से तीन दिन पहले दर्ज किया गया था। इसमें बच्चे को पीटने वाले व्यक्ति का नाम महाबीर बताया गया था। अदालत ने सवाल उठाया कि जब शुरुआती दस्तावेज में दूसरे नाम का जिक्र था, तो जांच अधिकारियों ने इसकी पड़ताल क्यों नहीं की।

अदालत के मुताबिक, जांच एजेंसी को यह पता लगाना चाहिए था कि महाबीर कहां रहता था। चाइल्डलाइन से बातचीत करने वाला वह व्यक्ति कौन था, जिसने खुद को आरोपी का भाई बताया था? क्या महाबीर, हेम राज का दूसरा नाम था या दोनों अलग-अलग व्यक्ति थे? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए कोई ठोस जांच नहीं की गई।

शव की पहचान भी नहीं हुई पूरी तरह साबित

हाई कोर्ट ने बच्चे के शव की पहचान से जुड़े सबूतों पर भी गौर किया। अदालत के सामने यह बात आई कि कपड़ों के अलावा शव को लापता बच्चे का साबित करने वाला कोई निर्णायक प्रमाण नहीं था।

पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने बताया था कि शव का केवल निचला हिस्सा मिला था। सिर, गर्दन, ऊपरी अंग और छाती का बड़ा हिस्सा गायब था। इससे शव की पहचान को लेकर संदेह और गहरा गया।

डीएनए जांच से भी इस मामले में निर्णायक नतीजा नहीं निकला। फोरेंसिक प्रयोगशाला में हड्डी के नमूने से डीएनए प्रोफाइल तैयार नहीं हो सकी। इस कारण बच्चे की मां के रक्त नमूने से उसका मिलान नहीं किया जा सका। अदालत ने माना कि इलाके से लापता एकमात्र बच्चा होने के कारण शव उसी का हो सकता था, लेकिन उपलब्ध सबूतों से इसकी निश्चित पुष्टि नहीं हुई।

मार्च 2022 में सुनाई गई थी मौत की सजा

इस मामले में निचली अदालत ने मार्च 2022 में हेम राज को हत्या और सबूत मिटाने का दोषी ठहराया था। हत्या के लिए उसे मौत की सजा सुनाई गई थी। इस सजा की पुष्टि के लिए मामला हाई कोर्ट के पास भेजा गया था।

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के सबूतों, बच्चे की पहचान और जांच की प्रक्रिया में सामने आई कमियों का आकलन किया। अदालत ने पाया कि आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त कानूनी साक्ष्य मौजूद नहीं थे।

इसी आधार पर हाई कोर्ट ने हेम राज को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत के फैसले ने इस मामले में जांच की गुणवत्ता और दोषसिद्धि के लिए ठोस सबूतों की अहमियत को फिर सामने ला दिया है।

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