हिसार। सिविल अस्पताल परिसर स्थित पार्क में मंगलवार सुबह करीब 11 बजे पॉलिथिन से ढका एक भ्रूण मिलने से हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम, पुलिस और फोरेंसिक एक्सपर्ट्स मौके पर पहुंच गए।

मामले की जांच करने पहुंची डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. अनामिका बिश्नोई ने बताया कि उन्हें डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. सुभाष खतरेजा से पार्क में भ्रूण पड़े होने की सूचना मिली थी।

शुरुआती जांच में जताई गई थी प्री-टर्म डिलीवरी की आशंका

डॉ. अनामिका बिश्नोई के मुताबिक, मौके पर जाकर देखने पर भ्रूण का सिर बाहर दिख रहा था और उसका साइज काफी बड़ा था। प्राथमिक दृष्टि में ऐसा लगा कि यह करीब 8 से साढ़े 8 महीने का भ्रूण होगा और किसी अनमैरिड गर्ल की प्री-टर्म डिलीवरी के बाद इसे यहां फेंका गया होगा। घटना की जानकारी तुरंत पुलिस को दी गई और साक्ष्यों से छेड़छाड़ रोकने के लिए पूरे इलाके को सील कर दिया गया।

फोरेंसिक और गायनेकॉलोजिस्ट की जांच में निकला बंदर का भ्रूण

सिटी थाना SHO सुरेंद्र कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और इलाके की घेराबंदी कर आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। हालांकि, जब फोरेंसिक टीम और सिविल अस्पताल की गायनेकॉलोजिस्ट ने बारीकी से जांच की, तो स्पष्ट हुआ कि यह इंसानी भ्रूण नहीं बल्कि बंदर का भ्रूण है। गायनेकॉलोजिस्ट की पुष्टि के बाद स्थिति साफ हुई।

किन परिस्थितियों में मिल सकता है बंदर का भ्रूण

पशु डॉक्टरों के अनुसार, गर्भ में सही विकास न होने, ऊंचाई से गिरने, दुर्घटना या गर्भाशय में संक्रमण की वजह से बंदरों में नेचुरल मिसकैरेज या समय से पहले प्रसव हो सकता है। हालांकि अस्पताल के पार्क में ऐसी स्थिति का मिलना सामान्य बात नहीं है।

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