Automobile Desk: भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में सब-4 मीटर एसयूवी सेगमेंट का मुकाबला दिन-ब-दिन और दिलचस्प होता जा रहा है। इस सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए जापानी वाहन निर्माता कंपनी होंडा कार्स इंडिया एक बिल्कुल नई कॉम्पैक्ट एसयूवी पर काम कर रही है। हालांकि, इस बार कंपनी एक अनोखी रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है। नए अपडेट्स के मुताबिक, होंडा अपनी इस आगामी एसयूवी में खुद का इंजन इस्तेमाल करने के बजाय किसी बाहरी कंपनी से पावरट्रेन हासिल करने पर विचार कर रही है।

हॉर्स पावरट्रेन से चल रही बातचीत

सामने आई नई जानकारियों के अनुसार, होंडा अपने इस नए प्रोजेक्ट के लिए ‘हॉर्स पावरट्रेन’ (Horse Powertrain) के साथ 1.2-लीटर इंजन की आपूर्ति को लेकर चर्चा कर रही है। हॉर्स पावरट्रेन दरअसल रेनॉ ग्रुप और चीन की गीली (Geely) कंपनी का एक साझा उपक्रम (जॉइंट वेंचर) है, जिसमें दुनिया की दिग्गज ऊर्जा कंपनी साउदी अरामको की भी हिस्सेदारी है। यह कंपनी विशेष रूप से हाइब्रिड और पेट्रोल आधारित पावरट्रेन तैयार करने के लिए जानी जाती है।

एक ही गाड़ी में मिलेंगे कई फ्यूल ऑप्शन

अगर यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो होंडा की नई एसयूवी ग्राहकों को अलग-अलग ईंधन विकल्पों का एक बेहतरीन संयोजन दे सकती है। इस नए 1.2-लीटर इंजन प्लेटफॉर्म को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे पारंपरिक पेट्रोल के साथ-साथ सीएनजी (CNG) और हाइब्रिड टेक्नोलॉजी के साथ भी इस्तेमाल किया जा सके। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारतीय ग्राहकों को एक ही मॉडल के अंदर अपनी जरूरत के मुताबिक फ्यूल ऑप्शन चुनने की सुविधा मिलेगी।

### होंडा को क्यों पड़ी बाहरी इंजन की जरूरत?

वर्तमान में होंडा के पास भारतीय बाजार के लिए 1.2-लीटर और 1.5-लीटर क्षमता वाले आई-वीटेक (i-VTEC) पेट्रोल इंजन मौजूद हैं। लेकिन आने वाले समय में देश में लागू होने वाले कड़े एमिशन (उत्सर्जन) नियमों और रियल ड्राइविंग एमिशन मानकों के चलते इंजनों को लगातार अपडेट करना बेहद खर्चीला साबित हो रहा है।

भारत में इस वक्त हाइब्रिड और सीएनजी गाड़ियों की मांग काफी तेजी से बढ़ रही है। पूरी तरह से एक नया मल्टी-फ्यूल इंजन प्लेटफॉर्म तैयार करने में किसी भी कंपनी को भारी-भरकम बजट और लंबा वक्त लगता है। ऐसे में तैयार और साबित हो चुके इंजन प्लेटफॉर्म को बाहर से लेना होंडा के लिए व्यावसायिक रूप से अधिक व्यावहारिक माना जा रहा है।

रेनो की आने वाली गाड़ियों में भी दिखेगी यह टेक्नोलॉजी

हॉर्स पावरट्रेन केवल होंडा ही नहीं, बल्कि भारतीय बाजार के लिए अपनी मौजूदगी का विस्तार करने की योजना बना रही है। यह कंपनी भारत में ही स्थानीय स्तर पर इंजन निर्माण का प्लांट लगाने की दिशा में भी काम कर रही है, जिससे लागत को नियंत्रित रखा जा सके। आगामी रेनो डस्टर हाइब्रिड में भी इसी कंपनी के पावरट्रेन का इस्तेमाल किए जाने की संभावना है।

डिजाइन और डेवलपमेंट में भारतीय कंपनियों का साथ

होंडा का लक्ष्य अपने वाहनों के विकास चक्र (डेवलपमेंट साइकल) को कम करना है। कंपनी चाहती है कि किसी गाड़ी के नए मॉडल को तैयार करने में लगने वाला समय 49 महीने से घटकर करीब 30 महीने रह जाए। इस प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने के लिए होंडा टाटा टेक्नोलॉजीज और टीसीएस (TCS) जैसी भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही है। टाटा टेक्नोलॉजीज एसयूवी की इंजीनियरिंग और डिजाइन में सहयोग दे रही है, जबकि टीसीएस इसके इंफोटेनमेंट सिस्टम पर काम कर सकती है।

कब होगी लॉन्च और किससे होगा मुकाबला?

होंडा की यह नई सब-4 मीटर एसयूवी 2028 तक भारतीय सड़कों पर उतर सकती है। इसे इंडोनेशिया में बिकने वाली नई पीढ़ी की डब्ल्यूआर-वी (WR-V) के प्लेटफॉर्म पर तैयार किए जाने की उम्मीद है। बाजार में आने के बाद इस एसयूवी का सीधा मुकाबला इस सेगमेंट में पहले से अपनी मजबूत पकड़ बना चुकी टाटा नेक्सन, मारुति सुजुकी ब्रेजा और हुंडई वेन्यू जैसी लोकप्रिय गाड़ियों से होगा।