Automobile Desk: दुनिया के ऑटोमोबाइल मार्केट में जब भी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की चर्चा होती है, तो अमेरिकी दिग्गज टेस्ला के साथ-साथ एक और नाम जो सबसे आगे दिखाई देता है, वह है चीन की वाहन निर्माता कंपनी BYD आज भले ही यह ब्रांड हर महीने हजारों-लाखों अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक कारों की डिलीवरी कर रहा हो, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस ग्लोबल ऑटो जाइंट का सफर गाड़ियों से नहीं बल्कि मोबाइल फोन की बैटरियों के निर्माण से शुरू हुआ था।
बीते लगभग तीन दशकों में कंपनी ने अपने विजन और तकनीक के दम पर बैटरी मैन्युफैक्चरिंग से लेकर दुनिया के स्थापित ऑटो मेकर्स को कड़ी चुनौती देने तक का शानदार मुकाम हासिल किया है।
हालिया अपडेट्स की मानें तो कंपनी भारतीय लग्जरी ऑटोमोबाइल बाजार में भी अपने पांव और मजबूत करने जा रही है। खबर है कि 13 नवंबर को BYD अपने सुपर-प्रीमियम सब-ब्रांड डेंजा (Denza) को आधिकारिक तौर पर भारत में उतारने वाली है। इस ब्रांड के तहत कंपनी की फ्लैगशिप कारें जैसे Z9 GT शूटिंग ब्रेक और D9 लग्जरी MPV भारतीय सड़कों पर दस्तक देंगी। कंपनी की योजना इन प्रीमियम गाड़ियों को 80 लाख रुपये से ऊपर के सेगमेंट में रखकर सीधे स्थापित लग्जरी कार निर्माताओं को टक्कर देने की है।
इस कंपनी की नींव फरवरी 1995 में चीन के टेक हब कहे जाने वाले शेनझेन शहर में पड़ी थी। इसके संस्थापक वांग चुआनफू, जो पेशे से एक केमिस्ट थे, उन्होंने उस दौर में रिचार्ज होने वाली बैटरियों के व्यापार में अपार संभावनाएं भांप ली थीं। 90 के दशक में जैसे-जैसे पर्सनल इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल फोन का चलन तेजी से बढ़ा, वैसे-वैसे उनमें लगने वाली हल्की और टिकाऊ बैटरियों की डिमांड भी आसमान छूने लगी।
चुआनफू ने इसी मौके का फायदा उठाया और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस के लिए बैटरी सप्लाई करना शुरू किया। बेहतर क्वालिटी और लगातार इनोवेशन के बूते बहुत जल्द इस कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में अपनी मजबूत पकड़ बना ली।

इलेक्ट्रॉनिक्स में मिली इस कामयाबी ने कंपनी को ऑटोमोटिव सेक्टर की तरफ कदम बढ़ाने का हौसला दिया। साल 2003 में कंपनी ने एक बड़ा फैसला लेते हुए आर्थिक तंगी से जूझ रही चीनी कार निर्माता शियान किनचुआन ऑटोमोबाइल में मेजॉरिटी स्टेक खरीद लिया। इस अधिग्रहण के साथ ही कंपनी का ऑटोमोबाइल सफर शुरू हुआ और 2005 में इन्होंने अपनी पहली पेट्रोल सेडान BYD F3 मार्केट में उतारी।
हालांकि कंपनी की नजरें भविष्य की ग्रीन टेक्नोलॉजी पर टिकी थीं, इसलिए इन्होंने हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक पावरट्रेन पर तेजी से रिसर्च शुरू कर दी। इसी मेहनत का नतीजा था कि 2008 में कंपनी ने प्लग-इन हाइब्रिड मॉडल F3DM पेश करके पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
इस चीनी कंपनी की सबसे बड़ी मजबूती यह रही कि इसने गाड़ियों के सबसे अहम पुर्जे यानी बैटरी के लिए कभी किसी दूसरे वेंडर पर निर्भरता नहीं रखी। कंपनी ने खुद की पेटेंट ब्लेड बैटरी टेक्नोलॉजी तैयार की, जो लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) केमिस्ट्री पर आधारित है। अपनी अनूठी बनावट और सख्त सेफ्टी टेस्ट्स की वजह से यह बैटरी सुरक्षित और टिकाऊ मानी जाती है। कारों की असेंबलिंग के साथ-साथ इलेक्ट्रिक मोटर और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्रिटिकल कंपोनेंट्स का इन-हाउस प्रोडक्शन करने की वजह से कंपनी को अपनी मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट और क्वालिटी पर शानदार कंट्रोल हासिल रहता है।
आज के समय में इस ब्रांड की पहुंच सिर्फ चीन या एशिया तक सीमित नहीं रह गई है। इलेक्ट्रिक कारों और हाइब्रिड व्हीकल्स के अलावा यह ब्रांड कमर्शियल इलेक्ट्रिक बसों, बड़े बैटरी स्टोरेज सिस्टम और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोडक्ट्स का भी बड़े पैमाने पर निर्माण करता है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2026 तक कंपनी के न्यू एनर्जी व्हीकल्स 120 से भी अधिक देशों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं।
सेल्स आंकड़ों की बात करें तो मई 2026 के अंत तक कंपनी 1.65 करोड़ से ज्यादा न्यू एनर्जी वाहनों की बिक्री का कीर्तिमान रच चुकी थी। इससे पहले साल 2024 में यह 1 करोड़ न्यू एनर्जी वाहन तैयार करने वाली दुनिया की पहली ऑटोमोबाइल कंपनी बनी थी। भारतीय बाजार में भी कंपनी पहले से ही अपने एटो 3, ई-मैक्स 7, सील और सीलियन 7 जैसे पॉपुलर मॉडल्स के जरिए इलेक्ट्रिक सेगमेंट में अच्छी पकड़ बना चुकी है।

