​Automobile Desk – आज के दौर में जब हर तरफ इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की चर्चा है और लोग पारंपरिक पेट्रोल-डीजल की महंगाई से राहत पाने के लिए बैटरी से चलने वाली गाड़ियां अपना रहे हैं, तब एक आम सवाल लगातार सामने आता है। जिस तरह घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली की तमाम जरूरतें पूरी की जा रही हैं, क्या उसी तर्ज पर इलेक्ट्रिक कारों की छतों पर भी सोलर पैनल लगाकर उन्हें आसानी से चलाया जा सकता है? बढ़ते बिजली बिलों और चार्जिंग स्टेशन की भागदौड़ के बीच यह विचार पहली नजर में बेहद आकर्षक और किफायती लग सकता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी अलग है।

कार की छत का सीमित आकार और ऊर्जा उत्पादन की सीमाएं

​किसी भी इलेक्ट्रिक वाहन की छत पर सोलर पैनल लगाने के आड़े आने वाली सबसे बड़ी बाधा उसकी शारीरिक बनावट और सीमित क्षेत्रफल है। अमूमन एक मानक कार की छत का कुल दायरा लगभग 10 से 25 वर्ग फीट के आसपास होता है। इतनी कम जगह पर जितने भी सोलर पैनल फिट किए जा सकते हैं, उनसे बहुत ज्यादा मात्रा में बिजली का उत्पादन होना नामुमकिन है।

​मौसम विज्ञान और तकनीकी आंकड़ों के अनुसार, तेज धूप के समय यानी दोपहर के वक्त एक वर्ग फीट जगह पर लगभग 92 वॉट तक की सौर ऊर्जा मिल सकती है। हालांकि, मौजूदा सोलर तकनीक शत-प्रतिशत ऊर्जा को बिजली में तब्दील नहीं कर पाती, बल्कि इसकी दक्षता (एफिशिएंसी) अमूमन 20 से 25 प्रतिशत के बीच ही रहती है। इस हिसाब से कार की छत पर लगे पैनल बमुश्किल कुछ सौ वॉट की बिजली ही पैदा कर पाते हैं। हालांकि इससे कार की मुख्य बैटरी बहुत धीमी गति से चार्ज जरूर हो सकती है, लेकिन रोजाना की ड्राइविंग की भारी-भरकम ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए यह नाकाफी है।

ग्लोबल स्तर पर सोलर कारों और विशेष ग्लास पर चल रहे नए प्रयोग

​भले ही मौजूदा समय में केवल सोलर रूफ के दम पर गाड़ी चलाना पूरी तरह संभव न हो, फिर भी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री और शोधकर्ता इस दिशा में लगातार नए और क्रांतिकारी प्रयोग कर रहे हैं। अमेरिका की क्लेमसन यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव रिसर्च से जुड़े शोध छात्रों ने हाल ही में बीएमडब्ल्यू (BMW) की एक सोलर इलेक्ट्रिक कार का प्रोटोटाइप तैयार किया है। इस शुरुआती मॉडल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसके बाहरी हिस्से पर लगे सोलर पैनल सूर्य की रोशनी को सोखकर बिजली बना सकें। परीक्षण के दौरान यह प्रोटोटाइप एक दिन में लगभग 5.7 किलोवाट-घंटे (kWh) की बिजली पैदा करने में कामयाब रहा, जिससे कार को करीब 12 मील यानी लगभग 19 किलोमीटर तक चलाने के बराबर ऊर्जा मिल सकती है।

​इसी कड़ी में फुयाओ ग्रुप ने भी एक अनूठा नवाचार किया है। कंपनी ने पारंपरिक और भारी सोलर पैनलों के बजाय एक खास सोलर सनरूफ विकसित किया है, जिसके कांच के अंदर ही सूक्ष्म सोलर सेल जड़े गए हैं। इस तकनीक की मदद से लगभग 720 वॉट तक बिजली का उत्पादन किया जा सकता है। हालांकि इतनी ऊर्जा से गाड़ी की मुख्य मोटर को सीधे चलाना तो मुमकिन नहीं है, लेकिन यह कार के भीतर चलने वाले अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और एसी जैसे सिस्टम्स का भार आसानी से उठा सकती है। इससे कार की मेन बैटरी पर पड़ने वाला दबाव कम होता है और वाहन की कुल ड्राइविंग रेंज में भी सकारात्मक इजाफा देखने को मिलता है। खासकर लंबे सफर पर निकलने वाले ड्राइवरों के लिए यह तकनीक बेहद मददगार साबित हो सकती है।