Automobile desk: भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से दक्षिण कोरिया की प्रमुख कार निर्माता कंपनी हुंडई मोटर इंडिया एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। कंपनी ने महाराष्ट्र के पुणे स्थित अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए 11,000 करोड़ रुपये का भारी निवेश करने का फैसला लिया है। इस महत्वाकांक्षी निवेश योजना का मुख्य उद्देश्य भारत में अपने उत्पादन ढांचे को नया आयाम देना तथा आने वाले समय में बाजार की बढ़ती मांग को सुचारू रूप से पूरा करना है।

कंपनी के प्रबंध निदेशक (MD) एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) तरुण गर्ग ने इस बात की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि यह पूंजीगत निवेश कई चरणों में चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। उन्होंने जानकारी दी कि इस पूंजी निवेश से केवल ऑटोमोबाइल के उत्पादन में ही बढ़ोतरी नहीं होगी, बल्कि इससे राज्य के औद्योगिक परिदृश्य में भी सकारात्मक बदलाव आएगा। स्थानीय स्तर पर नई उन्नत तकनीकों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
अगर पुणे प्लांट की वर्तमान क्षमताओं की बात की जाए, तो इस समय यहां से हर साल 1.70 लाख चार पहिया वाहनों का निर्माण किया जाता है। कंपनी की रणनीतिक योजना इस आंकड़े को क्रमबद्ध तरीके से बढ़ाते हुए साल 2030 तक 3.20 लाख यूनिट सालाना तक पहुंचाने की है। इसके अतिरिक्त, इस संयंत्र में आधुनिक इंजनों के निर्माण के लिए एक अत्याधुनिक हाई-टेक इंजन यूनिट भी स्थापित है, जहां हर साल 1.50 लाख से अधिक शक्तिशाली इंजनों का उत्पादन संभव है।
यह 11,000 करोड़ रुपये का नया निवेश हुंडई के उस दीर्घकालिक दृष्टिकोण का एक प्रमुख हिस्सा है, जिसके तहत कंपनी ने अगले सात वर्षों में भारतीय बाजार में कुल 15.5 अरब डॉलर निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। इस व्यापक योजना में सिर्फ कार असेंबली लाइन को बढ़ाना ही शामिल नहीं है, बल्कि शोध एवं विकास (R&D), घरेलू पार्ट्स आपूर्तिकर्ताओं के नेटवर्क को सशक्त बनाने और स्थानीय स्तर पर ही कलपुर्जों का अधिक से अधिक निर्माण करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
हुंडई मोटर ग्रुप के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन यूइसुन चुंग ने भारत को ग्लोबल बिजनेस के दृष्टिकोण से कंपनी का अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय केंद्र बताया है। हाल ही में भारत में बनी गाड़ियों के अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात का आंकड़ा 40 लाख यूनिट के पार पहुंच गया, जो भारतीय विनिर्माण क्षमता का लोहा मनवाता है। वर्ष 1999 से भारत से मेड-इन-इंडिया गाड़ियां बाहर के मुल्कों में भेजी जा रही हैं। भविष्य में जब चेन्नई और पुणे दोनों संयंत्र पूरी क्षमता के साथ काम करने लगेंगे, तब 2030 तक भारत में हुंडई की कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 11.40 लाख गाड़ियों की हो जाएगी।

