वेनेजुएला की विपक्षी नेता और नोबेल पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो रविवार को देश में फिर से नजर आईं. नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो दिसंबर के बाद पहली बार अपने देश लौटीं. उनकी वापसी ऐसे समय हुई है जब देश के लोकतांत्रिक भविष्य और अमेरिका की भूमिका को लेकर विवाद जारी है. प्रवक्ता डेविड स्मोलांस्की ने ने कहा कि यह वापसी लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता परिवर्तन और निकट भविष्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष राष्ट्रपति चुनावों की दिशा में एक बड़ा कदम है.
इस साल जनवरी में अमेरिकी सेना के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उठाकर ले जाने के बाद मारिया की यह पहली सार्वजनिक उपस्थिति है.
वेनेजुएला की विपक्षी नेता और नोबेल पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो 10 महीने से अधिक समय तक निर्वासन में रहने के बाद देश लौट आई हैं. मचाडो ने सोशल मीडिया पर अपनी वापसी की घोषणा की. उन्होंने लिखा कि मैं यहां आपके साथ हूं. उनकी निर्वासन से वापसी ऐसे समय में हुई है, जब देश के लोकतांत्रिक भविष्य और सत्ता में अमेरिका की भूमिका को लेकर संदेह बढ़ रहे हैं.
रविवार दोपहर मचाडो राजधानी कराकस के पश्चिम में स्थित लारा के एक चर्च पहुंचीं. वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया. समर्थकों ने उनसे हाथ मिलाया और उन्हें गले लगाया. वेनेजुएला के एक अन्य प्रमुख विपक्षी नेता एडमंडो गोंजालेज ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मचाडो के देश लौटने की पुष्टि की.
निकोलस मादुरो की सत्ता खत्म होने के बाद भी चुनाव की तारीख तय नहीं हुई है और कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज तय समय से अधिक पद पर बनी हुई हैं.
ट्रंप प्रशासन ने निकोलस मादुरो को पकड़ने के बाद उनकी दमनकारी सरकार के एक अन्य सदस्य डेल्सी रोड्रिगेज को राष्ट्रपति पद पर नियुक्त कर दिया था. तब से ट्रंप प्रशासन और मचाडो के बीच तनाव बढ़ गया है. मारिया कोरिना मचाडो को जनवरी 2025 में निकोलस मादुरो के प्रस्तावित शपथ ग्रहण समारोह के खिलाफ प्रदर्शन के बाद कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया था. इसके बाद वह करीब 11 महीने तक वेनेजुएला में छिपकर रहीं.
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