दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP के विरोध प्रदर्शन से पहले ट्रेनों के रद्द होने और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति पर रोक लगा दी गई है। पूरी दिल्ली को छावनी में बदल दिया गया है। आलम ये है कि, पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है, जहां शीर्ष अदालत ने मामले में गहरी चिंता जताई है। इस बीच महाराष्ट्र के NCP (SP) विधायक रोहित पवार ने प्रदर्शनकारियों से पुणे आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जो लोग दिल्ली नहीं पहुंच पा रहे हैं, वे शनिवार और रविवार को पुणे में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) के अभ्यर्थियों के आंदोलन में शामिल हों।
रोहित पवार ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली दूर हो सकती है, लेकिन संघर्ष उनके दरवाजे पर ही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के विरोध से घबराकर दिल्ली जाने वाली ट्रेनों को रद्द कर रही है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यात्रा पर पाबंदियां लगाई जा सकती हैं, लेकिन लोगों के विचारों और आंदोलन की भावना को नहीं रोका जा सकता।
दिल्ली जाने वाली कई ट्रेनें रद्द, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं
दिल्ली में 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले रेल और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई प्रतिबंध लगाए गए हैं। रेल मंत्रालय ने एहतियाती कदम के तौर पर 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर पहुंचने वाली मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द कर दिया है।
इसके अलावा, मुंबई सेंट्रल से चलने वाली दो राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों को पांच घंटे की देरी से चलाने का फैसला किया गया है, जबकि बांद्रा टर्मिनस-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस रद्द कर दी गई है। रेलवे के मुताबिक, स्टेशनों के आसपास भारी सड़क यातायात की आशंका को देखते हुए यह एहतियाती कदम उठाया गया है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा भी लागू है।
‘दिल्ली दूर है तो क्या हुआ, लड़ाई हमारे दरवाजे पर है’
रोहित पवार ने सोशल मीडिया के जरिए प्रदर्शनकारियों से पुणे पहुंचने की अपील की। उन्होंने कहा कि दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने के लिए देशभर से लाखों युवा और नागरिक रवाना हुए हैं, लेकिन ट्रेनों के रद्द होने से महाराष्ट्र के पुणे समेत कई इलाकों के लोग रास्ते में फंस गए हैं।
पवार ने कहा, “चलो पुणे चलते हैं! दिल्ली भले ही दूर हो, लेकिन लड़ाई हमारे दरवाजे पर ही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के आक्रोश से डर गई है और दिल्ली जाने वाली ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है। उनके मुताबिक, सरकार यात्रा पर रोक लगा सकती है, लेकिन लोगों के विचारों पर प्रतिबंध नहीं लगा सकती।
MPSC अभ्यर्थियों के आंदोलन को बताया ‘दिल्ली’
रोहित पवार ने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे 10 और 11 अक्टूबर को पुणे में चल रहे MPSC अभ्यर्थियों के सत्याग्रह को ही दिल्ली का प्रदर्शन मानकर उसमें शामिल हों। उन्होंने कहा कि पिछले नौ दिनों से पुणे में MPSC के छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
पवार के मुताबिक, यह आंदोलन सरकार की कथित असंवेदनशीलता और आयोग के अध्यक्ष के खिलाफ अभ्यर्थियों की शिकायतों से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि जो लोग दिल्ली नहीं जा सके, वे अपनी भागीदारी पुणे में दर्ज कराएं और आंदोलन को मजबूती दें।
उन्होंने इस संघर्ष को केवल छात्रों की लड़ाई मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र और संविधान को बचाने की लड़ाई है। पवार ने कहा कि विपक्ष और आंदोलनकारियों की एकजुटता तब तक कायम रहेगी, जब तक व्यवस्था उनकी मांगों पर ध्यान देने के लिए मजबूर नहीं हो जाती।
MPSC अध्यक्ष को हटाने की मांग पर जारी है विरोध
रोहित पवार और अन्य विपक्षी नेता पुणे में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनकारी आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार को पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, राज्य सरकार का कहना है कि MPSC अध्यक्ष का पद संवैधानिक होने के कारण सरकार उन्हें सीधे पद से नहीं हटा सकती। सरकार के अनुसार, वह इस संबंध में राज्यपाल को हटाने की सिफारिश कर सकती है, लेकिन अंतिम फैसला उसके हाथ में नहीं है।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m

