Dharm Desk – छाया ग्रह ‘राहु’ की स्थिति यदि कुंडली में प्रतिकूल हो, तो व्यक्ति के जीवन में अचानक मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह और बने-बनाये कार्यों में विघ्न आने लगते है। ऐसे में ज्योतिषशास्त्र विशेषज्ञों के अनुसार जीवनशैली में कुछ छोटे-छोटे बदलाव और पारंपरिक उपाय अपनाकर राहु के दुष्प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ज्योतिष समाधान में राहु दोष के दुष्प्रभावों से मुक्ति पाने के लिए 3 प्रमुख और अचूक उपायों पर विशेष रूप से जोर दिया जाता है।

नीले वस्त्रों के प्रयोग से दूरी

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, राहु ग्रह का सीधा संबंध नीले रंग से होता है। यदि आपकी कुंडली में राहु नकारात्मक प्रभाव दे रहा है, तो नीले रंग के कपड़ों का त्याग करना सबसे प्राथमिक कदम माना जाता है। न केवल नीले वस्त्र पहनने से बचना चाहिए, बल्कि अपने घर के वातावरण या दैनिक उपयोग की वस्तुओं में भी इस रंग के अत्यधिक प्रयोग से परहेज करना चाहिए।

वाणी पर नियंत्रण और अभद्र भाषा का त्याग

शास्त्रों के अनुसार हमारी वाणी सीधे तौर पर ग्रहों की चाल को प्रभावित करती है। जो व्यक्ति कटु वचन बोलता है या गाली-गलौज और अभद्र भाषा का प्रयोग करता है। उसका राहु स्वतः ही खराब होने लगता है। राहु को अनुकूल रखने के लिए सदैव मधुर, संयमित और सत्य वाणी का प्रयोग करना चाहिए। दूसरों के प्रति आदर् भाव रखना ही इसका सबसे बड़ा नैतिक उपाय है।

सरसों के तेल और आक का प्रयोग

विशेष उपाय करना राहु शांति के लिए शनिवार का दिन अत्यधिक शुभ माना जाता है। इसके लिए सबसे पहले एक कांसे की कटोरी में सरसों का तेल लें और उसे हल्का गुनगुना कर लें। इसके बाद इस तेल को अपने सिर के ऊपर से घड़ी की सुई की दिशा में 11 बार घुमाकर (उतारकर) रख लें। शनिवार के दिन ही इस तेल को किसी ‘आक’ (मदार/अकौड़ा) के पौधे की जड़ में अर्पित कर दें। आक का पौधा वही है, जिससे तोड़ने पर सफेद दूध जैसा तरल निकलता है। जिसके फूल शंकर जी को अर्पितकिए जाते हैं। यह सरसों तेल और मदार का उपाय लगातार 7 शनिवार तक पूरी श्रद्धा के साथ करने का विधान है। मान्यता है कि 8वें शनिवार तक व्यक्ति को अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, मानसिक शांति और रुके हुए कार्यों में सफलता महसूस होने लगती है।