पटना। बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ गया है। इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने राज्य में पहली बार गॉल ब्लैडर (पित्ताशय) कैंसर के लिए ‘रोबोटिक रैडिकल कोलेसिस्टेक्टॉमी’ को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। यह न केवल संस्थान, बल्कि पूरे बिहार के सरकारी चिकित्सा क्षेत्र के लिए एक क्रांतिकारी कदम है।
जटिल सर्जरी और विशेषज्ञ टीम
9 अप्रैल 2026 को आयोजित इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व रोबोटिक गैस्ट्रो सर्जन डॉ. राकेश कुमार सिंह, डॉ. नेत्रानंद और डॉ. दानिश की टीम ने चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल के मार्गदर्शन में किया। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. आनंतु, डॉ. विभा और डॉ. विनोद वर्मा शामिल रहे। लगभग 5 घंटे चली इस प्रक्रिया में दा विंची XI रोबोटिक मशीन का उपयोग किया गया। चिकित्सकों ने कैंसर को पूरी तरह खत्म करने के लिए पित्ताशय के साथ-साथ लीवर के प्रभावित हिस्से और संबंधित लिम्फ नोड्स को भी सुरक्षित रूप से हटा दिया।
मरीज की स्थिति और रिकवरी
सारण (छपरा) निवासी 66 वर्षीय महिला पिछले एक वर्ष से पेट दर्द और सूजन से पीड़ित थीं। जांच में गॉल ब्लैडर कैंसर की पुष्टि होने के बाद उन्हें आईजीआईएमएस रेफर किया गया था। पारंपरिक ओपन सर्जरी के विपरीत, इस रोबोटिक सर्जरी की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें रक्तस्राव नगण्य रहा। जहां सामान्य सर्जरी में 2-3 यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती है, वहां रोबोटिक तकनीक ने इसे न्यूनतम रखा। परिणाम स्वरूप, मरीज सर्जरी के पहले ही दिन चलने-फिरने में सक्षम हो गईं और अब पूर्णतः स्वस्थ हैं।
किफायती दर पर विश्वस्तरीय तकनीक
संस्थान के निदेशक डॉ. बिन्देय कुमार ने टीम को बधाई देते हुए बताया कि आईजीआईएमएस जल्द ही रोबोटिक सर्जरी का अर्धशतक (50 मामले) पूरा कर लेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निजी अस्पतालों में लाखों में होने वाली यह अत्याधुनिक सर्जरी यहां मात्र 50,000 रुपये की किफायती दर पर उपलब्ध है। संस्थान में डॉ. संजय कुमार, डॉ. साकेत कुमार और डॉ. अमरजीत कुमार राज जैसे विशेषज्ञ भी इस तकनीक का प्रशिक्षण ले रहे हैं, ताकि भविष्य में अधिक मरीजों को लाभ मिल सके।
रोबोटिक सर्जरी का बढ़ता दायरा
डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि 10 मार्च 2026 को रोबोटिक यूनिट की शुरुआत के बाद से संस्थान ने निरंतर कीर्तिमान स्थापित किए हैं। इससे पूर्व संस्थान में बिहार की पहली पैंक्रियाटिक कैंसर की रोबोटिक सर्जरी भी सफल रही थी। उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा ने इस सफलता को बिहार के गरीब मरीजों के लिए एक वरदान बताया है, जिन्हें अब उन्नत इलाज के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
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