IIT दिल्ली के बायोकेमिकल इंजीनियरिंग विभाग के एक PHD छात्र की AIIMS में इलाज के दौरान मौत हो गई। छात्र बिहार के पूर्णिया का रहने वाला था। वह 18 अगस्त से गंभीर हालत में एम्स के ट्रॉमा सेंटर के ICU में भर्ती था। सूत्रों के मुताबिक, छात्र ने नींद की गोलियों का अधिक सेवन किया था, जिसके बाद उसकी हालत गंभीर हो गई थी। उसे इलाज के लिए एम्स के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा था, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। इस मामले में पुलिस को अब तक छात्र के परिजनों की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली है।
18 अगस्त को कमरे में बेहोश मिले थे
नई दिल्ली। IIT दिल्ली के बायोकेमिकल इंजीनियरिंग विभाग के PhD स्कॉलर मनीष आनंद की एम्स ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान मौत हो गई। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 18 अगस्त को मनीष दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका गांव स्थित अपने किराए के कमरे में बेहोशी की हालत में मिले थे। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा था।
45 दिनों से अधिक चला इलाज
पुलिस के अनुसार, मनीष 45 दिनों से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रहे। 3 अक्टूबर को एम्स ट्रॉमा सेंटर में उनकी मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और IIT दिल्ली के सुरक्षा अधिकारी की शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया गया है। किशनगढ़ थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह धारा आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
बिहार के पूर्णिया के रहने वाले थे मनीष
IIT दिल्ली के बायोकेमिकल इंजीनियरिंग विभाग के PhD स्कॉलर मनीष आनंद बिहार के पूर्णिया के रहने वाले थे। वह दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका गांव में किराए के कमरे में रहते थे। 18 अगस्त को उन्हें कमरे में बेहोशी की हालत में पाया गया था। इसके बाद उन्हें AIIMS ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां वह आईसीयू में भर्ती थे। पुलिस ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि मामला किसी विशेष व्यक्ति के खिलाफ दर्ज किया गया है या नहीं। वहीं, रिसर्च स्कॉलर की मौत की वास्तविक वजह भी फिलहाल स्पष्ट नहीं है। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
धारा 108 के तहत FIR दर्ज
मनीष आनंद की मौत के मामले में किशनगढ़ पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत FIR दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार, 18 अगस्त को मनीष अपने कमरे में बेहोश मिले थे और कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। पड़ोसियों ने दरवाजा तोड़कर उन्हें बाहर निकाला। इसके बाद पुलिस ने मनीष को इलाज के लिए AIIMS ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया था। 45 दिनों से अधिक समय तक इलाज चलने के बाद 3 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि मामले में IIT दिल्ली के सुरक्षा अधिकारी की शिकायत और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर कार्रवाई की गई है।
IIT दिल्ली के कैंपस के अंदर नहीं हुई थी घटना
मनीष आनंद की मौत से जुड़ी FIR IIT दिल्ली के सिक्योरिटी ऑफिसर की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। संस्थान ने स्पष्ट किया है कि घटना IIT दिल्ली के कैंपस के अंदर नहीं हुई थी। परिवार की ओर से भी किसी व्यक्ति पर शक या आरोप नहीं लगाया गया है। मनीष की याद में संस्थान में शोक सभा आयोजित की गई।
बीमारी का चल रहा था इलाज
सूत्रों के मुताबिक, मनीष किडनी और लीवर से जुड़ी गंभीर बीमारी का इलाज करा रहे थे। 18 अगस्त को मुनिरका स्थित उनके किराए के कमरे में वह गंभीर हालत में पाए गए थे। इसके बाद उन्हें AIIMS ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां 45 दिनों से अधिक समय तक उनका इलाज चला। 3 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई। पुलिस ने किशनगढ़ थाने में BNS की धारा 108 के तहत FIR दर्ज की है। हालांकि, पुलिस ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि मामला किसी विशेष व्यक्ति के खिलाफ दर्ज किया गया है या नहीं। मामले की जांच जारी है। मनीष के बड़े भाई 2025 बैच के IFS अधिकारी हैं। उन्होंने बताया कि परिवार की ओर से किसी व्यक्ति पर किसी तरह का आरोप नहीं लगाया गया है।
अगस्त में IIT दिल्ली के कैंपस में हुई थी एक अन्य छात्र की मौत
गौरतलब है कि 22 अगस्त को IIT दिल्ली कैंपस में एक अन्य छात्र की मौत हुई थी। संस्थान ने मामले के कारणों की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की थी। IIT दिल्ली के मुताबिक, मृतक छात्र MSc Physics का 31 वर्षीय छात्र था। घटना के बाद संस्थान की ओर से मामले की जांच की गई। दोनों घटनाएं अलग-अलग हैं और मनीष आनंद की घटना IIT दिल्ली के कैंपस के बाहर मुनिरका स्थित उनके किराए के कमरे में हुई थी।
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