Lalluram Desk. जम्मू की एक अदालत ने BCCI अध्यक्ष मिथुन मन्हास के जन्मतिथि रिकॉर्ड में गड़बड़ी और हेरफेर के आरोपों को लेकर उनके खिलाफ FIR दर्ज करने की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि आपराधिक जांच शुरू करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं। यह आदेश 6 नवंबर को जम्मू के विशेष रेलवे मजिस्ट्रेट संदीप सिंह सेन (KCS – न्यायिक) ने सुनाया।

यह याचिका जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) के पूर्व मानद सचिव सुदर्शन मेहता ने ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ (BNSS), 2023 की धारा 175(3) के तहत दायर की थी। मेहता ने मन्हास की जन्मतिथि को लेकर धोखाधड़ी, जालसाजी और हेरफेर का आरोप लगाया था।

जम्मू की विशेष रेलवे मजिस्ट्रेट अदालत ने शिकायत, उससे जुड़े दस्तावेजों और नवाबाद पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट का अध्ययन किया। कोर्ट को FIR दर्ज करने का आदेश देने के लिए कोई ठोस आधार नहीं मिला।

पुलिस जांच के अनुसार, मन्हास के सभी आधिकारिक दस्तावेजों – जैसे शैक्षणिक प्रमाण पत्र, पैन कार्ड, आधार कार्ड और रोजगार रिकॉर्ड – में उनकी जन्मतिथि लगातार 12 सितंबर, 1977 ही दर्ज है।

अदालत ने गौर किया कि मेहता ने मुख्य रूप से दिल्ली एंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन (DDCA) की वेबसाइट से ली गई जानकारी की एक फोटोकॉपी पर भरोसा किया था। कोर्ट ने कहा कि यह साबित करने के लिए काफी नहीं है कि मन्हास ने एसोसिएशन के सामने कोई जाली दस्तावेज पेश किए थे या कोई गलत बयान दिया था।

आदेश में यह भी कहा गया कि दो प्रविष्टियों (entries) के बीच अंतर होना – जब तक कि जालसाजी, हेरफेर या धोखाधड़ी के इरादे का कोई स्वतंत्र सबूत न हो – अपने आप में कोई आपराधिक अपराध नहीं माना जा सकता।

अदालत ने यह भी पाया कि शिकायतकर्ता ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर सके जिससे यह साबित हो कि मन्हास ने क्रिकेट में अनुचित लाभ पाने के लिए जानबूझकर कोई गलत जानकारी दी या जाली दस्तावेज तैयार किए।

पर्याप्त आधार न होने के कारण याचिका को खारिज करते हुए, अदालत ने स्पष्ट किया कि मेहता के पास अभी भी यह विकल्प है कि वे DDCA से अपने रिकॉर्ड की पुष्टि करवाएं और, यदि आवश्यक हो, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग करें।

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