हेमंत शर्मा, इंदौर। उम्र 75 साल… जीवनसाथी का साथ छूट चुका है… परिवार में कोई संतान भी नहीं। इस उम्र में जिस बुजुर्ग को अपनों के सहारे और सुकून की जरूरत है, वह अपनी पत्नी का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों नगर निगम के चक्कर काट रहा है। हाथ में दस्तावेजों की फाइल है, मन में पत्नी के जाने का दर्द है और आंखों में एक ही उम्मीद कि शायद अब कोई अधिकारी उनकी परेशानी समझेगा और वर्षों नहीं, कम से कम एक साल से अटके काम को पूरा कर देगा।

यह कहानी है राऊ के गायत्री नगर में रहने वाले 75 वर्षीय राजगुरु दीनानाथ की। वर्ष 2025 में उनकी पत्नी का निधन हुआ था। पत्नी के जाने का दुख अभी कम भी नहीं हुआ था कि मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की लंबी सरकारी प्रक्रिया ने उनकी जिंदगी और मुश्किल कर दी। नगर निगम से लेकर महापौर कार्यालय और कलेक्टर कार्यालय तक उन्होंने दस्तक दी, लेकिन अब तक पत्नी का मृत्यु प्रमाण पत्र उनके हाथ नहीं आया।

पत्नी के जाने का गम अलग, सरकारी दफ्तरों की दौड़ ने तोड़ दी हिम्मत

राजगुरु दीनानाथ के लिए पत्नी का निधन जिंदगी का सबसे बड़ा दुख था, लेकिन इसके बाद शुरू हुई कागजी कार्रवाई अब उनकी दूसरी बड़ी परेशानी बन गई है। पत्नी का मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं होने के कारण वे उनके बैंक खाते में जमा राशि नहीं निकाल पा रहे हैं। यहां तक कि मकान से जुड़े नगर निगम के टैक्स संबंधी काम में भी परेशानी आ रही है। परिवार में कोई संतान नहीं होने के कारण उनकी मदद करने वाला भी कोई नहीं है। ऐसे में उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें खुद ही कभी नगर निगम तो कभी कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

श्मशान की रसीद, पंचनामा-एफिडेविट सब मौजूद, फिर भी नहीं बना

बुजुर्ग का कहना है कि पत्नी के निधन के बाद अंतिम संस्कार विधिवत किया गया था। उनके पास श्मशान घाट की रसीद भी है। इसके अलावा पंचनामा, एफिडेविट और नगर निगम से संबंधित जरूरी रसीदें भी उपलब्ध हैं। उनका दावा है कि मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए जो दस्तावेज मांगे गए, वे सभी जमा कर चुके हैं। वे जन्म से इंदौर में रह रहे हैं। इसके बावजूद वर्ष 2025 से अब तक उनका काम पूरा नहीं हो सका। सवाल यह है कि जब बुजुर्ग के पास मृत्यु से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं, तो आखिर प्रमाण पत्र जारी करने में इतनी लंबी देरी क्यों हो रही है?

5 हजार रुपये दे दूं तो अभी बन जाएगा मृत्यु प्रमाण पत्र

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप रिश्वत मांगने को लेकर है। राजगुरु दीनानाथ का आरोप है कि कलेक्टर कार्यालय में तहसीलदार के यहां चक्कर लगाने के दौरान उनसे 5 हजार रुपये मांगे जा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर वे रिश्वत दे दें तो मृत्यु प्रमाण पत्र तुरंत बन सकता है। बुजुर्ग का दर्द है कि परिवार में कोई संतान नहीं है और आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं कि वे किसी को पैसे देकर अपना काम करवा सकें। उनका सवाल है कि जब सभी दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो फिर उन्हें पैसे देने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है? हालांकि, रिश्वत मांगने के इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना बाकी है। यदि आरोप सही हैं तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर बेहद गंभीर सवाल है।

तीन बार महापौर से मिले, हर बार उम्मीद लेकर लौटे बुजुर्ग

अपनी परेशानी लेकर राजगुरु दीनानाथ एक या दो बार नहीं, बल्कि तीन बार महापौर पुष्यमित्र भार्गव से मुलाकात कर चुके हैं। हर बार उन्हें उम्मीद रही कि अब उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा। लेकिन तीन मुलाकातों के बाद भी मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बन सका। आखिर एक बुजुर्ग को अपनी पत्नी की मृत्यु का प्रमाण हासिल करने के लिए कितनी बार जनप्रतिनिधियों के दरवाजे पर जाना पड़ेगा? क्या एक बार शिकायत सामने आने के बाद अधिकारियों की जिम्मेदारी नहीं थी कि वे खुद दस्तावेजों की जांच कर समस्या का समाधान करते?

महापौर का आश्वासन- दस्तावेज सही हुए तो 24 घंटे में बनेगा प्रमाण पत्र

मामला सामने आने के बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि यदि बुजुर्ग के दस्तावेज सही हैं तो 24 घंटे के भीतर उनका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया जाएगा। महापौर के इस आश्वासन के बाद अब बुजुर्ग को एक बार फिर उम्मीद बंधी है। लेकिन सवाल यह भी है कि जब वे तीन बार महापौर से मिल चुके थे, तब उनके मामले का समाधान पहले क्यों नहीं हो पाया?

डिजिटल व्यवस्था के दावों के बीच एक बुजुर्ग की बेबसी

नगर निगम में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को ऑनलाइन और आसान बनाने के दावे किए जाते हैं। नागरिकों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए डिजिटल व्यवस्था और जोन स्तर पर सुविधाओं की बात होती है। लेकिन राजगुरु दीनानाथ का मामला इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रहा है। एक बुजुर्ग अपनी पत्नी के निधन के बाद जरूरी प्रमाण पत्र के लिए एक साल से परेशान है। बैंक खाते में जमा रकम तक नहीं निकाल पा रहा है। तीन बार महापौर से मिल चुका है और कलेक्टर कार्यालय के चक्कर भी काट चुका है। इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।

अब प्रशासन को देना होगा जवाब, बुजुर्ग को कब मिलेगी राहत?

यह मामला केवल एक प्रमाण पत्र का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की संवेदनशीलता का है, जो एक बुजुर्ग की मजबूरी को समझने में नाकाम नजर आ रही है। पत्नी को खोने के बाद राजगुरु दीनानाथ को अब अपनी ही पत्नी की मृत्यु साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों में दस्तावेज दिखाने पड़ रहे हैं। क्या महापौर का 24 घंटे का आश्वासन इस बार हकीकत बनेगा? क्या तहसीलदार कार्यालय में 5 हजार रुपये मांगने के बुजुर्ग के आरोपों की जांच होगी? और क्या नगर निगम उन अधिकारियों की जवाबदेही तय करेगा, जिनके कारण एक बुजुर्ग को इतना परेशान होना पड़ा? अब जरूरत सिर्फ आश्वासन की नहीं, बल्कि तत्काल कार्रवाई की है। ताकि 75 वर्षीय राजगुरु दीनानाथ को अपनी पत्नी का मृत्यु प्रमाण पत्र पाने के लिए फिर किसी दफ्तर की चौखट पर खड़ा न होना पड़े।

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