दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में आज IRCTC होटल घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अहम सुनवाई हो रही है। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी व पूर्व सीएम राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव समेत कुल 9 आरोपी व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हुए हैं। विशेष अदालत आज सभी आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप पढ़ेगी, जिसके बाद इस हाई-प्रोफाइल मामले में नियमित ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होगी।
क्या है पूरा मामला और जमीन कनेक्शन?
यह पूरा विवाद साल 2004-2005 का है, जब लालू प्रसाद यादव देश के रेल मंत्री थे। मार्च 2004 में रेलवे के दो प्रमुख होटलों (रांची और पुरी के BNR होटल) के प्रबंधन का जिम्मा IRCTC को सौंपा गया था। CBI का आरोप है कि इसके बाद टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं बरतकर ‘सुजाता होटल्स’ को फायदा पहुंचाया गया।
इस कथित लाभ के बदले पटना में एक बेशकीमती जमीन के लेन-देन का मामला सामने आया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, वह जमीन पहले एक अन्य कंपनी के जरिए खरीदी गई और बाद में उसका प्रभावी नियंत्रण लालू परिवार से जुड़ी कंपनी ‘लारा प्रोजेक्ट्स’ के पास आ गया। जमीन की वास्तविक कीमत और सौदे की कीमत में भारी अंतर को ही इस मनी लॉन्ड्रिंग जांच का मुख्य आधार बनाया गया है।
कानूनी कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रिया
साल 2017 में CBI ने इस मामले में FIR दर्ज की और अप्रैल 2018 में चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज कर अपनी जांच आगे बढ़ाई। गत 10 सितंबर 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू परिवार समेत 9 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए थे, जबकि 7 आरोपियों को बरी कर दिया गया था।
दूसरी ओर, इस घटनाक्रम पर राजनीति गरमा गई है। भाजपा प्रवक्ता नीरज कुमार शर्मा ने तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा है कि इस गंभीर दौर में उन्हें राजनीति में सत्ता के दुरुपयोग के इन पुराने सवालों से भागने के बजाय जनता को जवाब देना चाहिए और राजद के सामने नेतृत्व का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

