Automobile Desk : भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में इन दिनों 4×4 (फोर-बाय-फोर) और ऑल-व्हील ड्राइव (AWD) SUVs की मांग तेजी से बढ़ी है। महिंद्रा थार, स्कॉर्पियो-एन, फोर्स गुरखा और टोयोटा फॉर्च्यूनर जैसे मॉडल्स को देखकर अक्सर लोग इन्हें खरीदने का मन बना लेते हैं। हालांकि, सिर्फ दमदार लुक और पावरफुल इमेज के आधार पर 4×4 व्हीकल चुनना हर किसी के लिए अक्लहामंदी का फैसला नहीं होता। बिना जरूरत के यह सिस्टम चुनना जेब पर भारी पड़ सकता है।

4×4 टेक्नोलॉजी मुख्य रूप से उन रास्तों के लिए डिजाइन की गई है जहां आम गाड़ियां हार मान लेती हैं। इस सिस्टम में इंजन की ताकत गाड़ी के चारों पहियों में बराबर या जरूरत के हिसाब से बंट जाती है। अगर कार का कोई एक पहिया कीचड़, गड्ढे, या ढलान पर फंस जाता है, तो बाकी तीन पहिए ताकत लगाकर गाड़ी को सुरक्षित बाहर निकाल लेते हैं। यही कारण है कि ऊबड़-खाबड़ रास्तों, बर्फबारी, रेत और गहरी चढ़ाइयों पर 4×4 की परफॉर्मेंस का कोई जवाब नहीं होता।
अगर आपकी गाड़ी का इस्तेमाल ज्यादातर शहर की पक्की सड़कों, हाईवे और रोजाना ऑफिस आने-जाने के लिए होता है, तो 4×4 कार आपके बजट को बिगाड़ सकती है। शहर के ट्रैफिक और सिग्नल-टू-सिग्नल ड्राइविंग में फोर-व्हील ड्राइव की क्षमता का 5% भी इस्तेमाल नहीं हो पाता। सामान्य शहर और हाईवे ड्राइविंग के लिए टू-व्हील ड्राइव (4×2) यानी फ्रंट-व्हील या रियर-व्हील ड्राइव गाड़ियां पूरी तरह से सक्षम और आरामदायक होती हैं।
आर्थिक नजरिए से देखें तो 4×2 की तुलना में 4×4 वेरिएंट की शुरुआती कीमत काफी अधिक होती है। इसके अतिरिक्त, अतिरिक्त गियरबॉक्स और डिफरेंशियल पार्ट्स के कारण गाड़ी का वजन बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर फ्यूल एफिशिएंसी यानी माइलेज पर पड़ता है। साथ ही, जटिल मैकेनिकल सेटअप के चलते इनके मेंटेनेंस और सर्विसिंग का खर्च भी आम कारों से ज्यादा आता है। कम बजट और कम रनिंग कॉस्ट चाहने वाले खरीदारों के लिए यह एक अतिरिक्त बोझ साबित हो सकता है।
दूसरी तरफ, जो लोग अक्सर रोड ट्रिप्स, एडवेंचर, ऑफ-रोडिंग कैंपिंग के शौकीन हैं या फिर पहाड़ी इलाकों और दूर-दराज़ के कठिन रास्तों पर रहते हैं, उनके लिए 4×4 सिस्टम एक बेहद उपयोगी और सुरक्षित विकल्प है। ऐसी परिस्थितियों में यह एक्स्ट्रा ग्रिप और कंट्रोल देता है, जिससे कठिन रास्तों पर ड्राइविंग का जोखिम काफी कम हो जाता है।
नई कार चुनते समय गाड़ी की पावर या केवल 4×4 की बैजिंग से प्रभावित होने के बजाय अपनी वास्तविक जरूरत को समझना ज्यादा जरूरी है। ड्राइविंग की आदतें, रोजाना तय की जाने वाली दूरी और सड़कों की स्थिति को ध्यान में रखकर ही 4×2 या 4×4 का सही चुनाव करना पैसों की सही बचत कराता है।


