हरियाणा के कुरुक्षेत्र में इजरायल तकनीक से देश का पहला एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केंद्र शुरू हुआ है। सरकार ने साल 2030 तक 15,500 मीट्रिक टन शहद उत्पादन का बड़ा लक्ष्य तय किया है।
कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। खेती-किसानी के बीच अब एक ऐसा मॉडल तेजी से उभर रहा है, जो कम जमीन, कम लागत और ज्यादा कमाई का दावा कर रहा है। सरकार ने अब शहद उत्पादन को बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी कर ली है। इतना ही नहीं, इजरायल तकनीक की मदद से देश में पहला अत्याधुनिक केंद्र भी स्थापित किया गया है, जहां किसानों को ट्रेनिंग से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने की तैयारी कराई जा रही है।

योजना सिर्फ शहद बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए हजारों लोगों को रोजगार, किसानों की अतिरिक्त आय और खेती की पैदावार बढ़ाने का रोडमैप तैयार किया गया है। सरकार ने 2030 तक 15,500 मीट्रिक टन शहद उत्पादन का बड़ा लक्ष्य तय किया है और हजारों नए मधुमक्खी पालकों को जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है।

दरअसल, यह पूरा मॉडल हरियाणा में तैयार किया जा रहा है, जहां मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने विश्व मधुमक्खी दिवस कार्यक्रम में ऐलान किया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के ‘श्वेत क्रांति से स्वीट क्रांति’ विजन को आगे बढ़ाते हुए राज्य को ‘हनी हब’ बनाया जाएगा। कुरुक्षेत्र के रामनगर में इजरायल तकनीक पर आधारित देश का पहला एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केंद्र स्थापित किया गया है, जहां शहद उत्पादन, प्रोसेसिंग, स्टोरेज और मार्केटिंग की ट्रेनिंग दी जा रही है।

सरकार मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए बक्सों, कॉलोनियों और उपकरणों पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है। साथ ही शहद को भावांतर भरपाई योजना में शामिल कर 120 रुपये प्रति किलो संरक्षित मूल्य तय किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा, महिलाएं और छोटे किसान इसे स्टार्टअप मॉडल की तरह अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं, जबकि सरकार वित्तीय और तकनीकी सहायता देगी।


