इंदर कुमार, जबलपुर। मध्य प्रदेश की न्यायधानी जबलपुर में लगातार बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाई कोर्ट की युगलपीठ ने राज्य सरकार से एक बेहद महत्वपूर्ण सवाल पूछा है कि क्या जबलपुर की तर्ज पर प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों के लिए भी ऐसी ही ट्रैफिक एक्सपर्ट कमेटी बनाई जा सकती है?
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आदेश के बावजूद नहीं सुधरे हालात, जनता परेशान
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि पूर्व में कोर्ट द्वारा दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद शहर के यातायात सुधार में कोई ठोस प्रगति नहीं दिख रही है। शहर की बेतरतीब और लचर ट्रैफिक व्यवस्था का खामियाजा आज भी आम जनता को रोज जाम में फंसकर भुगतना पड़ रहा है।
सरकार ने दिए 5 विशेषज्ञों के नाम, प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
गौरतलब है कि गत 9 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने जबलपुर में ट्रैफिक सुधार के लिए एक्सपर्ट कमेटी गठित करने के निर्देश दिए थे। इसी अनुपालन में राज्य सरकार की ओर से ट्रैफिक सुधार और मॉनिटरिंग के लिए 5 विशेषज्ञों के नाम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए गए। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को अब तक किए गए कार्यों और ट्रैफिक सुधार की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है।
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13 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
हाई कोर्ट की इस तल्ख टिप्पणी और रुख से उम्मीद जागी है कि अब न केवल जबलपुर, बल्कि इंदौर, भोपाल और ग्वालियर जैसे प्रदेश के अन्य बड़े शहरों की चरमराती यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए राज्य स्तर पर कोई बड़ा रोडमैप तैयार हो सकता है। अदालत ने इस पूरे मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 अक्टूबर की तारीख तय की है।
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