हेमंत शर्मा, इंदौर। बहुचर्चित भागीरथपुरा दूषित पानीकांड को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने जांच आयोग द्वारा तैयार की गई 600 से अधिक पन्नों की विस्तृत जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मंजूरी दे दी है। यह रिपोर्ट जल्द ही हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी।
जांच रिपोर्ट में हुए कई चौंकाने वाले खुलासे
600 से अधिक पन्नों की इस रिपोर्ट में भागीरथपुरा कांड से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भागीरथपुरा क्षेत्र में पेयजल पाइपलाइन के जर्जर होने और उसमें सीवर का गंदा पानी मिलने की जानकारी जिम्मेदार तंत्र और अधिकारियों को पहले से थी। चेतावनी और जानकारी होने के बावजूद पेयजल पाइपलाइन को बदलने में भारी देरी की गई, जो इस हादसे की मुख्य वजह बनी। रिपोर्ट में दूषित पानी पीने के कारण 36 लोगों की दुखद मौत होने का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
सालों से धूल फांक रही थी रिपोर्ट
बताया जा रहा है कि यह जांच रिपोर्ट पिछले कई महीनों से संबंधित अधिकारियों की टेबल पर पड़ी धूल फांक रही थी और सार्वजनिक नहीं की गई थी। अब हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और लापरवाही पूरी तरह से उजागर हो सकेगी।
अधिवक्ताओं का रुख और आगे की कार्रवाई
मामले में पैरवी कर रहे अधिवक्ता मनीष यादव और विभोर खंडेलवाल ने बताया कि रिपोर्ट की आधिकारिक कॉपी प्राप्त होने के बाद वे कोर्ट में आगे की बहस और कानूनी कार्रवाई शुरू करेंगे। रिपोर्ट के सार्वजनिक होने से भागीरथपुरा कांड में अधिकारियों की जवाबदेही तय होने और पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने की उम्मीद एक बार फिर जग गई है।
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