LeT Commander Hashim Musa Encounter: 30 सितंबर की सुबह भारतीय सेना (Indian Army) ने लश्कर कमांडर हाशिम मूसा को मार गिराया। लश्कर कमांडर हाशिम मूसा को मार गिराने के साथ ही जम्मू-कश्मीर में 2022 से सक्रिय बताए जा रहे चार सदस्यीय लश्कर कमांडर ग्रुप का अंत हो गया है। गृह मंत्रालय के मुताबिक जुनैद रमजान अहमद, अबू ताल्हा, यासिर और हाशिम मूसा जम्मू-कश्मीर में कई बड़े आतंकी हमलों में शामिल था। चारों कमांडर अलग-अलग ऑपरेशनों में मारे जा चुके हैं। वहीं ऐसा पहली बार है कि हाशिम मूसा को जहन्नूम पहुंचाने के बाद अब J&K में न जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) और न ही लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) का कोई कमांडर सक्रिय है। गृह मंत्रालय ने इसे आतंकी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका बताया है।
गृह मंत्रालय ने हाशिम मूसा के खात्मे को जम्मू-कश्मीर में लश्कर के पूरे नेटवर्क के लिए बड़ा झटका बताया है। गृह मंत्रालय के मुताबिक हाशिम मूसा को जहन्नूम पहुंचाने के बाद अब J&K में न जैश और न ही लश्कर का कोई कमांडर सक्रिय है।
हाशिम मूसा के मारे जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों की कमांड स्ट्रक्चर को बड़ा झटका लगा है। सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद दोनों ही इस समय जम्मू-कश्मीर में किसी बड़े स्थानीय या पाकिस्तानी कमांडर की प्रत्यक्ष मौजूदगी के बिना ऑपरेट कर रहे हैं। घाटी और जम्मू संभाग में सक्रिय आतंकियों के पास फिलहाल ऐसा कोई बड़ा चेहरा नहीं है, जो जमीन पर रहकर बड़े आतंकी ऑपरेशन की कमान संभाल सके। यह आतंकी संगठनों के लिए बड़े झटके के समान है।
अब OGW नेटवर्क पर नजर
बड़े कमांडरों के खात्मे के बाद अब आतंकियों की नजर OGW यानी ओवरग्राउंड वर्कर्स हैंं। ये स्थानीय मददगार और ठिकाने उपलब्ध कराने वाले लोग होतें हैं, जो हथियार पहुंचाने वाले नेटवर्क और आतंकियों की आवाजाही में मदद करने वाले संपर्क के तौर पर काम करते हैं। सुरक्षा एजेंसियों के सामने अगली चुनौती य़ही है। मूसा के मामले में भी सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि वह इतने लंबे समय तक जंगलों और पहाड़ी इलाकों में किस नेटवर्क की मदद से सक्रिय रहा। बिना स्थानीय मदद के मूसा इतनी दिन तक नहीं छूप सकता था।

4 साल से एक्टिव था 4 आतंकियों का ये ग्रुप
बता दें कि 2022 से जम्मू-कश्मीर में एक्टिव लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के 4 आतंकियों के ग्रुप पर भारतीय एजेंसियों की नजर थी। इसमें जुनैद रमजान अहमद, अबू ताल्हा, यासिर और हाशिम मूसा शामिल थे।जुनैद रमजान को दिसंबर 2024 में ही मार दिया था। उसके मोबाइल से सुरक्षाबलों को इन चारों की एक तस्वीर मिली, जिससे एजेंसियों को ग्रुप और उसके नेटवर्क की अहम जानकारी मिली। इसके बाद ताल्हा को अप्रैल 2025 में, यासिर सुलेमान और मूसा को सितंबर 2026 में ढेर कर दिया गया था। 2025 में पहलगाम हमले के बाद संदिग्ध आतंकियों में मूसा का स्केच जारी हुआ था। हालांकि, बाद में पता चला कि वो इस हमले में शामिल नहीं था। 28 जुलाई को एनकाउंटर में लश्कर आतंकी सुलेमान को मार गिया गया था।
कौन था हाशिम मूसा
सूत्रों के अनुसार, मूसा वर्ष 2022 में घुसपैठ के जरिए कश्मीर घाटी में दाखिल हुआ था। इसके बाद वह इलाके में अपना नेटवर्क सक्रिय करने में जुटा था। उसके पीर पंजाल के दोनों ओर आतंकी गतिविधियों में शामिल होने और युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती करने में भूमिका की जानकारी भी सामने आई थी। लश्कर-ए-तैयबा में शामिल होने से पहले उसके पाकिस्तान के स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) में कमांडो के तौर पर काम किया था। गृह मंत्रालय के मुताबिक ये अगस्त 2023 में हलान हमला, मई 2023 में कांडी हमला, दिसंबर 2023 में DKG हमला, मई 2024 में शाहसितार हमला में शामिल था। इसके अलावा जून 2024 में शिव खोरी हमला, अक्टूबर 2024 में गगनगीर हमला, अक्टूबर 2024 में बूटापथरी हमला और अप्रैल 2025 का बैसरन हमले में शामिल ता।
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