विजय कुमार, जमुई। बिहार में चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता का पालन कराने के लिए निर्वाचन आयोग कड़े निर्देश जारी करता है, लेकिन मैदानी स्तर पर इसकी किस तरह धज्जियां उड़ाई जाती हैं, जो जमुई में देखने को मिली है। जमुई जिला मुख्यालय स्थित अंचल कार्यालय में बनाए गए मतदान केंद्र संख्या 146 के बाहर नियमों को ताक पर रखकर कोशी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एमएलसी उम्मीदवार डॉ. एनके यादव का एक बड़ा फोटोयुक्त पोस्टर लगा दिया गया। इतना ही नहीं, इस बैनर के साये में मतदाताओं को पर्चियां भी बांटी जा रही थीं, जिससे मतदान केंद्र के बाहर अफरा-तफरी और हंगामे का माहौल बन गया।
मतदान केंद्र के बाहर सजा प्रचार काउंटर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस बूथ पर कुल 615 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने वाले थे। मतदान की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही थी, लेकिन केंद्र के ठीक बाहर नियमों को ताक पर रखकर समर्थकों द्वारा उम्मीदवार के समर्थन में बैनर-पोस्टर टांग दिए गए। चुनाव आयोग के स्पष्ट निर्देश हैं कि मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का राजनीतिक प्रचार, कैंप लगाना या बैनर लगाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद सरेआम यह सब होना प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।


तीसरी चेतावनी के बाद हरकत में आए समर्थक
इस पूरे मामले का एक लाइव वीडियो भी तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में मौके पर मौजूद एक जिम्मेदार अधिकारी समर्थकों पर बरसते हुए साफ नजर आ रहे हैं। अधिकारी कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कह रहे हैं आपको तीसरी बार मना किया जा रहा है, फिर भी आप बार-बार पोस्टर लगा रहे हैं। मतदान केंद्र के पास पोस्टर-बैनर लगाना पूरी तरह प्रतिबंधित है, दोबारा लगाया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी की इस सख्त फटकार और चेतावनी के बाद आनन-फानन में समर्थकों ने बैनर को वहां से हटाया।
अधिकारियों की चुप्पी और CO का गैर-जिम्मेदाराना रवैया
इस गंभीर घटना के बाद जब बूथ पर तैनात अन्य सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों से प्रतिक्रिया लेनी चाही गई, तो वे सभी कुछ भी बोलने से कतराते नजर आए। हद तो तब हो गई जब इस मामले पर गिद्धौर प्रखंड की अंचल अधिकारी (CO) आरती भूषण से सवाल किया गया, तो उन्होंने भी कैमरे के सामने स्पष्ट जवाब देने से पूरी तरह परहेज किया। उनका यह वीडियो भी सामने आया है, जो प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर संदेह पैदा करता है।
डीएम ने दिए जांच के आदेश
निर्वाचन नियमों के मुताबिक यह साफ है कि किसी भी पोलिंग बूथ के 100 मीटर के दायरे में चुनाव प्रचार करना या बैनर लगाना चुनावी अपराध की श्रेणी में आता है। अब बड़ा सवाल यह है कि जिस जगह यह पोस्टर लगाया गया था, क्या वह प्रतिबंधित दायरे में था? और आखिर किसकी शह पर फोटोयुक्त बैनर लगाने की अनुमति दी गई? मामले की गंभीरता को देखते हुए जमुई के जिलाधिकारी (DM) ने इस पूरे प्रकरण पर जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रशासन की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस आचार संहिता उल्लंघन के मामले में दोषी अधिकारियों और समर्थकों पर क्या कार्रवाई होती है।

