पटना। बिहार विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनाव के तहत पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। इस सीट पर पिछले करीब तीन दशकों से भाजपा के प्रो. नवल किशोर यादव का दबदबा रहा है, जिन्हें भाजपा ने एक बार फिर मैदान में उतारा है। वहीं, महागठबंधन की ओर से राजद ने डॉ. संजीव कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है। अब जन सुराज की एंट्री से यह मुकाबला पूरी तरह त्रिकोणीय हो गया है।

​प्रशांत किशोर खुद संभालेंगे मोर्चा

​जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर आज पटना की सड़कों पर उतरेंगे और पार्टी प्रत्याशी डॉ. दिव्या ज्योति का नामांकन दाखिल करवाएंगे। इसके जरिए पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह भाजपा के इस पुराने गढ़ को चुनौती देने के लिए पूरी ताकत से तैयार है। शुरुआत में डॉ. दिव्या ज्योति निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी में थीं, लेकिन महात्मा गांधी और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने जन सुराज का दामन थाम लिया।

​कौन हैं डॉ. दिव्या ज्योति?

​डॉ. दिव्या ज्योति मूल रूप से पटना के बाढ़ अनुमंडल की रहने वाली हैं।

  • ​वह चाणक्य कॉलेज ऑफ हायर स्टडीज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।
  • ​चाणक्य फाउंडेशन की सीईओ के रूप में भी कार्यरत हैं।
  • ​शिक्षा के क्षेत्र में उनका करीब 25 वर्षों का अनुभव है।
  • ​वह शिक्षक अधिकारों, बालिका शिक्षा और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों के उत्थान के लिए लंबे समय से सक्रिय रही हैं।

​समान वेतन और पुरानी पेंशन मुख्य मुद्दे

​चुनाव में डॉ. दिव्या ज्योति ने शिक्षकों से जुड़े कई गंभीर मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। इनमें समान वेतन, पुरानी पेंशन नीति (OPS) और शिक्षकों का सम्मान मुख्य हैं। जन सुराज का मानना है कि शिक्षकों की मांगों को चुनावी राजनीति के बजाय उनके वास्तविक अधिकारों के नजरिए से देखा जाना चाहिए। पार्टी की नजर मौजूदा व्यवस्था से नाराज और बदलाव की उम्मीद कर रहे शिक्षक मतदाताओं पर है।
​जन सुराज के मैदान में आने से पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का पारंपरिक राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गया है, जिससे मुकाबला काफी कड़ा हो गया है।