कुंदन कुमार, पटना। बिहार की राजनीति में इन दिनों ‘जनसुराज’ पार्टी और उसके संयोजक प्रशांत किशोर लगातार चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं। हाल ही में जनसुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती के साथ हुई मारपीट की एक घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस घटना के सामने आने के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया है और विपक्षी दलों ने जनसुराज पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला? वायरल वीडियो की सच्चाई
सामने आई खबरों के मुताबिक, यह पूरा विवाद चुनाव के दौरान किराए पर ली गई गाड़ियों के बकाये भुगतान को लेकर है। बताया जा रहा है कि चुनावी गतिविधियों के सिलसिले में एक वेंडर से बड़ी संख्या में गाड़ियां भाड़े पर ली गई थीं। इन गाड़ियों के किराए की लगभग सत्तर लाख रुपये की भारी-भरकम राशि बकाया थी।
लंबी समयावधि बीत जाने के बाद भी जब भुगतान नहीं हुआ, तो वेंडर और उसके कुछ सहयोगी अपना बकाया पैसा वसूलने के लिए सीधे जनसुराज कार्यालय पहुंच गए। कार्यालय में बातचीत के दौरान विवाद इतना बढ़ गया कि मामला हाथापाई और मारपीट तक पहुंच गया। वायरल वीडियो में इस पूरे हंगामे और झड़प की तस्वीरें साफ तौर पर देखी जा सकती हैं, जिसने पार्टी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विपक्ष का जोरदार हमला
इस घटना के बाद विरोधी दलों को जनसुराज को घेरने का एक बड़ा मौका मिल गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता कुणाल कृष्ण ने प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी पर कड़ा सियासी हमला बोला है।
कुणाल कृष्ण ने तीखे शब्दों में कहा कि जालसाज किशोर और धनसुराज को बिहार की जनता अब अच्छी तरह समझ चुकी है। उन्होंने आगे कहा कि प्रशांत किशोर की कथित जालसाजी और खोखले दावे अब जनता के सामने बेनकाब हो चुके हैं। प्रदेश अध्यक्ष के साथ हुई इस घटना का जिक्र करते हुए भाजपा प्रवक्ता ने तंज कसा कि अभी जो हुआ है, यह तो महज एक बानगी है, आने वाले समय में अभी बहुत कुछ होना बाकी है।
जनसुराज के लिए बढ़ती मुश्किलें और राजनीतिक भविष्य
प्रशांत किशोर ने बिहार में बदलाव और एक नई वैकल्पिक राजनीति की हुंकार भरकर जनसुराज अभियान की शुरुआत की थी। हालांकि, इस तरह की घटनाएं और वित्तीय प्रबंधन को लेकर उठने वाले सवाल पार्टी की छवि को बड़ा झटका दे रहे हैं। चुनाव के दौरान हुए करोड़ों के खर्च और अब वेंडरों के भुगतान को लेकर सड़क पर आ रहे विवाद यह दर्शाते हैं कि ज़मीनी स्तर पर संगठन के भीतर प्रबंधन से जुड़ी गंभीर खामियां मौजूद हैं।
एक तरफ जहां प्रशांत किशोर बिहार की पुरानी पार्टियों पर भ्रष्टाचार और कुव्यवस्था के आरोप लगाते हैं, वहीं उनकी अपनी पार्टी के कार्यालय में इस तरह की हिंसक झड़प होना और 70 लाख रुपये के बकाये का मामला सामने आना उनके दावों पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। आने वाले दिनों में यह विवाद जनसुराज के लिए और अधिक मुश्किलें खड़ी कर सकता है, क्योंकि विरोधी दल इस मुद्दे को जनता के बीच आक्रामक तरीके से भुनाने की पूरी तैयारी में हैं।

