कुंदन कुमार, पटना। राजधानी पटना में बुधवार को सियासी गलियारे से लेकर प्रशासनिक हलकों तक उस वक्त हड़कंप मच गया, जब भारी संख्या में संविदा पर कार्यरत एएनएम और ड्रेसर पद के परीक्षाार्थी अपनी मांगों को लेकर सीधे जनता दल यूनाइटेड (जदयू) प्रदेश कार्यालय के बाहर पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों का यह हुजूम स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात करने की गुहार लेकर आया था, लेकिन मौके पर उनके मौजूद न मिलने और कार्यालय में ताला बंद होने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई और गुस्साए युवाओं ने सड़क पर ही प्रदर्शन शुरू कर दिया।

​अलग-अलग और प्रमुख मांगें

​इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से दो अलग-अलग समूह शामिल थे, जिनकी अपनी-अपनी समस्याएं और मांगें थीं:

  • ​संविदा एएनएम कर्मियों का आक्रोश: संविदा पर लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रही एएनएम (सहायक नर्दिवासी मिडवाइफ) कर्मियों की मांग है कि उन्हें बिना किसी देरी के तत्काल प्रभाव से स्थाई (परमानेंट) किया जाए। साथ ही, मौजूदा महंगाई को देखते हुए उनके वेतन में संतोषजनक बढ़ोतरी की जाए।
  • ​ड्रेसर अभ्यर्थियों की मांग: दूसरी ओर, ड्रेसर पद की परीक्षा दे चुके अभ्यर्थियों का कहना है कि विभाग द्वारा जारी किया गया परिणाम अधूरा है, इसलिए दूसरी रिजल्ट सूची तुरंत जारी की जानी चाहिए ताकि वंचित योग्य अभ्यर्थियों को भी न्याय मिल सके।

​स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात की थी जिद

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, ये सभी प्रदर्शनकारी स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार से सीधे मिलकर अपना ज्ञापन सौंपना चाहते थे और अपनी समस्याओं से उन्हें अवगत कराना चाहते थे। जब वे जदयू कार्यालय पहुंचे, तो वहां का गेट बंद मिला और ताला लटका हुआ था। मंत्री के न मिलने से आक्रोशित छात्र-छात्राएं और स्वास्थ्य कर्मी कार्यालय के मुख्य द्वार के बाहर ही धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे।

​मंत्री दामोदर राउत की गाड़ी को घेरा

​स्थिति तब और अधिक तनावपूर्ण हो गई जब कुछ ही देर बाद मंत्री दामोदर राउत का काफिला वहां से गुजर रहा था। प्रदर्शनकारियों ने अचानक उनकी गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया, जिससे वहां अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।
​घटना की गंभीरता को भांपते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचे। पुलिस ने सूझबूझ और संयम से काम लेते हुए उग्र प्रदर्शनकारियों को समझाया-बुझाकर शांत कराया और मंत्री की गाड़ी को सुरक्षित वहां से निकाला। फिलहाल मौके पर स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन इन स्वास्थ्य कर्मियों और अभ्यर्थियों का आक्रोश इस बात का संकेत है कि अगर जल्द ही उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो वे आने वाले दिनों में और भी बड़ा आंदोलन छेड़ सकते हैं।