झांसी के राजापुर निवासी राजकुमार ने पत्नी और बेटे के साथ श्री सिद्धेश्वर मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों के बाद हिंदू धर्म में वापसी की. उसकी पत्नी अफसरी खातून ने भी हिंदू धर्म अपनाकर अपना नाम अनीता रखा.
झांसी. रक्सा थाना क्षेत्र के राजापुर निवासी राजकुमार ने शनिवार को पत्नी और बेटे के साथ हिंदू धर्म में वापसी की. श्री सिद्धेश्वर मंदिर में हवन-पूजन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के बाद यह प्रक्रिया पूरी की गई. इससे पहले राजकुमार ने जिलाधिकारी को शपथपत्र देकर अपने मूल धर्म में लौटने की इच्छा की जानकारी दी थी.
बंगाल में बदला था धर्म
राजकुमार के मुताबिक, करीब 17 साल पहले पश्चिम बंगाल में मजदूरी करने के दौरान उसने इस्लाम धर्म अपना लिया था. इसके बाद उसका नाम रफीक खान पुत्र सजीमुद्दीन, निवासी विशनपुरा, थाना कालियाचक, जिला मालदा हो गया था.
उसका दावा है कि मजदूरी के दौरान साथियों ने उस पर इस्लाम अपनाने के लिए दबाव बनाया था. वर्ष 2013 में उसने मालदा निवासी अफसरी खातून से निकाह किया, जिससे उसकी तीन बेटियां और एक बेटा है.
पहचान के दस्तावेज दिखाए
कुछ समय पहले राजकुमार परिवार के साथ झांसी लौट आया. यहां उसने नगर धर्माचार्य हरिओम पाठक से संपर्क किया. धर्माचार्य ने उसे धर्म में वापसी की प्रक्रिया से पहले प्रशासन को सूचना देने की सलाह दी.
इसके बाद राजकुमार ने 22 सितंबर को जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थनापत्र देकर हिंदू धर्म में लौटने की इच्छा जताई. मूल पहचान के प्रमाण के तौर पर उसने पिता के राशन कार्ड और प्राथमिक विद्यालय की कक्षा पांच की अंकतालिका में दर्ज नाम का उल्लेख किया.
हवन के बाद धर्म वापसी
पुलिस जांच के बाद शनिवार को श्री सिद्धेश्वर मंदिर में आचार्य राजीव पाठक के सान्निध्य में हवन-पूजन कराया गया. धार्मिक अनुष्ठानों के बाद राजकुमार ने हिंदू धर्म अपनाया.
उसकी पत्नी अफसरी खातून ने भी हिंदू धर्म अपनाया और अपना नाम अनीता रखा. कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद, हिंदू जागरण मंच और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े लोग भी मौजूद रहे. इनमें विनोद अवस्थी, प्रदीप खरे, पुरुषोत्तम स्वामी, पीयूष रावत, विकास अवस्थी, रामकुमार मिश्र और अतुल मिश्रा शामिल रहे.
बारिश से बेटियां नहीं पहुंचीं
राजकुमार ने बताया कि धर्म वापसी कार्यक्रम में उसकी तीनों बेटियां शामिल नहीं हो सकीं. उसके मुताबिक, वे कार्यक्रम में आने के लिए तैयार थीं, लेकिन तेज बारिश के कारण नहीं पहुंच पाईं.
राजकुमार का कहना है कि बेटियों को घर पर ही गंगाजल और गोमूत्र पिलाया गया.
गांव में करेगा काम
राजकुमार ने बताया कि अब वह पत्नी और बच्चों के साथ राजापुर में ही रहना चाहता है. उसे गांव में स्टील के गेट बनाने का काम मिल गया है.
उसने बताया कि उसकी तीनों बेटियों और चार वर्षीय बेटे का सरकारी स्कूल में दाखिला कराया जा चुका है. राजकुमार के मुताबिक, वह गांव में ही मकान बनाकर परिवार के साथ रहेगा.
बीडा मुआवजे से इनकार
राजकुमार से जब पूछा गया कि क्या वह करीब 1,200 किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल से झांसी बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी बीडा में ली गई जमीन के बदले मिलने वाले मुआवजे के लिए लौटा है, तो उसने इससे इनकार किया.
राजकुमार ने कहा कि वह अपने पुराने घर वापस आया है और अब परिवार के साथ यहीं रहना चाहता है. उसका कहना है कि बीडा से उसका कोई लेना-देना नहीं है.


