Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने संस्कृत, उर्दू, फारसी और अरबी विषयों में स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्ति मामले में अभ्यर्थियों के पक्ष में ऐतिहासिक और राहत भरा फैसला सुनाया है। झारखंड हाईकोर्ट ने हेमंत सरकार को 4 हफ्ते में स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक पद पर नियुक्ति करने का आदेश दिया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने विनोद कुमार सिंह सहित अन्य सभी रिट याचिकाओं को स्वीकार करते हुए अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी खारिज करने से जुड़े 21 जून 2023 के नोटिस को पूरी तरह रद्द कर दिया है।

अदालत ने झारखंड सरकार और जेएसएससी को निर्देश दिया है कि वे अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी स्वीकार कर उन्हें चार सप्ताह के भीतर स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक के पद पर नियुक्ति प्रदान करें। अदालत ने सरकार और आयोग की दलील खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि जब राज्य सरकार ने खुद नियमों के तहत स्नातक योग्यता को मान्यता दी थी और आयोग ने संशोधित विज्ञापन निकाला था, तब सरकार अपने ही निर्णय से पीछे नहीं हट सकती।

बता दें कि वर्ष 2015 की नियमावली के तहत संस्कृत आदि विषयों के लिए स्नातकोत्तर (पीजी) या आचार्य की डिग्री का प्रावधान था, लेकिन अस्पष्टता दूर करने के लिए राज्य सरकार ने नियमावली के नियम 16 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए 2017 में पत्र जारी कर न्यूनतम अंकों के साथ स्नातक की डिग्री को भी पात्रता के रूप में मान्यता दी थी। इसके आधार पर जेएसएससी ने संशोधित विज्ञापन जारी किया था, जिसमें सफल होने के बाद अभ्यर्थियों को इस आधार पर बाहर कर दिया गया कि उनके पास पीजी या आचार्य की डिग्री नहीं है।

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