पूरी: सरकार शिक्षा के विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए हर साल करोड़ों रुपये के कोष का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आती है। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर से महज 60 किलोमीटर और पूरी जिलाधिकारी कार्यालय से मात्र 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक प्राथमिक विद्यालय की स्थिति किसी सुदूर या दुर्गम इलाके से भी बदतर है।

यह चिंताजनक स्थिति पूरी सदर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले भाईलपुर स्थित अरिहंत जागेश्वरी उच्च प्राथमिक विद्यालय की है। चंदनपुर-खोरधा मुख्य मार्ग और ऐतिहासिक जगन्नाथ सड़क के पास स्थित होने के बावजूद प्रशासन की नजर इस स्कूल की बदहाली पर नहीं पड़ी है।
यह विद्यालय पिछले 40 वर्षों से केवल एक ही कमरे के भीतर संचालित हो रहा है। मूलभूत सुविधाओं के नाम पर यहाँ कुछ भी उपलब्ध नहीं है।
विद्यालय के एकमात्र कमरे में छठी और सातवीं कक्षा के लगभग 42 छात्र-छात्राएं एक साथ बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
दो शिक्षक एक ही समय पर एक ही कमरे में दोनों अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाते हैं, जिससे पढ़ाई की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ता है।
स्कूल में बच्चों के बैठने के लिए टेबल या चेयर तक की व्यवस्था नहीं है। छात्र जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते हैं।
बारिश के मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है। हल्की सी बारिश होते ही कमरे की छत से पानी टपकने लगता है, जिससे पढ़ाई बाधित होती है और अक्सर स्कूल को बंद करना पड़ता है।
कक्षाओं के अलावा मध्याह्न भोजन के समय छात्रों को जिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, वह प्रशासनिक अनदेखी का स्पष्ट प्रमाण है। स्कूल परिसर में उचित व्यवस्था न होने के कारण बच्चे कचरे से भरे स्थानों पर बैठकर खाना खाने को मजबूर हैं, जहाँ आसपास आवारा कुत्ते घूमते रहते हैं।
स्थान की कमी के कारण कई बच्चे पास की नदी के किनारे बने पुलिया (शंख) पर तो कुछ अपनी साइकिलों की सीट पर थाली रखकर भोजन करते हैं। स्कूल में न तो बच्चों के लिए साफ पीने के पानी की कोई सुविधा है और न ही शौचालय की।
इस विद्यालय में भाईलपुर, अरिहंत, अंतिमकेरा और चुराली जैसे आसपास के गांवों के सैकड़ों बच्चे प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने आते हैं। ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर स्थानीय प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों तक बार-बार गुहार लगाई है।
इसके बावजूद आज तक स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। राजधानी और जिला मुख्यालय के इतने करीब होने के बाद भी बुनियादी सुविधाओं का न होना शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।



