अविनाश श्रीवास्तव, सासाराम। कैमूर पहाड़ी के ऊपर बसे वे सैकड़ों गांव, जहां स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भी बिजली की रोशनी नहीं पहुंच पाई थी, अब पहली बार सीधे पावर ग्रिड से जगमगाएंगे। इस बहुप्रतीक्षित विकास कार्य के लिए राज्य सरकार ने 351 करोड़ 50 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि की स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस ऐतिहासिक पहल से रोहतास और कैमूर जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का वर्षों का इंतजार आखिरकार खत्म होने जा रहा है।

​वर्ष 2017 का सौर ऊर्जा प्रयास और उसकी विफलता

​बता दें कि इतिहास में जब से बिजली की खोज हुई है, तब से रोहतास और कैमूर जिले के लगभग 200 गांवों में बिजली का नामोनिशान नहीं था। पूर्व में वर्ष 2017 में तात्कालिक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विशेष प्रयासों से लगभग 130 करोड़ रुपये की लागत से सौर ऊर्जा (सोलर एनर्जी) के माध्यम से 198 गांवों में बिजली पहुंचाने का काम किया गया था। हालांकि, उचित रखरखाव के अभाव और तकनीकी समस्याओं के कारण समय के साथ वह पूरी व्यवस्था ठप पड़ गई और योजना बेकार साबित हुई। सोलर सिस्टम के फेल होने से एक बार फिर अंधेरे में डूबे इन गांवों के दिन अब स्थायी समाधान के साथ बदलने वाले हैं।

​21 हजार से अधिक घरों को मिलेगा सीधा लाभ

​सरकार के इस नए और बड़े फैसले से रोहतास जिले के 90 और कैमूर जिले के 108 गांवों को सीधा फायदा पहुंचेगा। आंकड़ों के अनुसार, कुल मिलाकर 21,644 घरों को पावर ग्रिड से सीधे तौर पर बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। इस बड़े विद्युतीकरण अभियान को अमलीजामा पहनाने के लिए पुनरुत्थान वितरण क्षेत्र योजना के तहत पहले 117 करोड़ 80 लाख रुपये की योजना स्वीकृत की गई थी, जिसे बाद में संशोधित करके 351 करोड़ 50 लाख रुपये की पुनरीक्षित लागत की स्वीकृति दी गई है, ताकि ग्रिड आधारित मजबूत ट्रांसमिशन लाइन और बुनियादी ढांचा तैयार किया जा सके।

​स्थानीय नेताओं और जनप्रतिनिधियों का संघर्ष रंग लाया

​पहाड़ पर बसे इन दुर्गम गांवों में बिजली पहुंचाने के लिए लंबे समय से लगातार संघर्ष कर रहे भाजपा नेता व पूर्व विधायक ललन पासवान ने इस सौगात पर खुशी जताई है। उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री की दूरगामी सोच तथा केंद्र एवं राज्य सरकार के सम्मिलित प्रयासों से यह असंभव दिखने वाला सपना अब सच होने जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों में भी इस मेगा प्रोजेक्ट को लेकर भारी उत्साह है, क्योंकि ग्रिड से बिजली जुड़ने से पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और जीवन स्तर में एक क्रांतिकारी सुधार देखने को मिलेगा।