कैथल: जिले में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने धरातल स्तर पर सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। कैथल की उपायुक्त (डीसी) अपराजिता ने गुरुवार को लघु सचिवालय में अधिकारियों के साथ फसल अवशेष प्रबंधन समीक्षा बैठक की। उन्होंने पराली की घटनाओं को शून्य पर लाने के लिए जिले में 629 नोडल अधिकारी तैनात किए हैं। डीसी ने स्पष्ट किया कि जिले में धारा 163 लागू कर दी गई है और उल्लंघन करने वाले किसानों पर जुर्माना लगाने के साथ-साथ उनके राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की जाएगी।
मुख्य सचिव ने की प्रदेशस्तरीय समीक्षा, कैथल का कैलरम गांव ‘रेड जोन’ में
बैठक से पहले हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी उपायुक्तों के साथ पराली प्रबंधन की तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान डीसी अपराजिता ने मुख्य सचिव को जिले की स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि कैथल जिले का कैलरम गांव ‘रेड जोन’ में शामिल है, जबकि 16 अन्य गांवों को ‘येलो जोन’ की श्रेणी में रखा गया है। इन चिह्नित हॉटस्पॉट गांवों पर प्रशासन की विशेष नजर रहेगी।
पर्याप्त मशीनरी उपलब्ध, एचसीएस अधिकारियों के निर्देशन में फील्ड में निगरानी
जिले में निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तैनात सभी 629 नोडल अधिकारी संबंधित एचसीएस (HCS) अधिकारियों के निर्देशन में काम कर रहे हैं। डीसी ने बताया कि जिले में इन-सीटू (In-situ) और एक्स-सीटू (Ex-situ) मशीनरी पर्याप्त संख्या में मौजूद है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों के साथ समन्वय बनाकर इन मशीनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित कराएं ताकि अवशेषों का सही निस्तारण हो सके।
प्रोत्साहन राशि की मिलेगी जानकारी, पराली की बेल्स के लिए बनेंगे स्टोरेज यार्ड
उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे किसानों से निरंतर संवाद कायम रखें और उन्हें पराली जलाने के नुकसान के प्रति जागरूक करें। इसके साथ ही सरकार द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन पर दी जा रही प्रोत्साहन राशि और उपलब्ध तकनीकी सुविधाओं की जानकारी समय पर दी जाए। पराली से बनने वाली बेल्स (गांठों) के सुरक्षित रखरखाव के लिए उपयुक्त स्थानों पर स्टोरेज यार्ड की पहचान करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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