करनाल, 22 सितंबर। करनाल कोऑपरेटिव शुगर मिल ने राष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मिल को तकनीकी दक्षता के क्षेत्र में लगातार चौथी बार प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इसके साथ ही वर्ष 2025-26 के लिए गन्ना विकास के क्षेत्र में भी करनाल शुगर मिल को राष्ट्रीय स्तर पर पहला पुरस्कार मिला है।

दोनों पुरस्कार 22 सितंबर को नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर, विंडसर पैलेस में नेशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड की ओर से आयोजित मेगा ट्रिपल इवेंट में प्रदान किए गए। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पुरस्कारों की ट्रॉफियां प्रदान कीं। इस दौरान हरियाणा के सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा भी मौजूद रहे।

करनाल शुगर मिल की ओर से उपायुक्त एवं मिल के अध्यक्ष डॉ. आनंद कुमार शर्मा और प्रबंध निदेशक अदिति ने पुरस्कार ग्रहण किए।

कम रिकवरी वाले क्षेत्र में भी बेहतर तकनीकी प्रदर्शन

मिल प्रबंधन के अनुसार, करनाल शुगर मिल कम रिकवरी वाले क्षेत्र में आने के बावजूद तकनीकी दक्षता के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है। इसी प्रदर्शन के आधार पर मिल को लगातार चौथी बार राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी दक्षता का प्रथम पुरस्कार मिला है।

इसके अलावा मिल को वर्ष 2025-26 के लिए गन्ना विकास में भी प्रथम पुरस्कार दिया गया है। प्रबंधन ने इस उपलब्धि का श्रेय मिल के कर्मचारियों, अधिकारियों और गन्ना उत्पादक किसानों के संयुक्त प्रयासों को दिया।

ISO 9001:2015 प्रमाणन भी मिला

करनाल शुगर मिल को वर्ष 2025-26 के लिए गुणवत्ता प्रबंधन के अंतरराष्ट्रीय मानक ISO 9001:2015 का प्रमाणन भी मिला है। मिल प्रबंधन का दावा है कि पिछले 15 वर्षों में यह प्रमाणन हासिल करने वाली करनाल शुगर मिल हरियाणा की पहली मिल है।

48.10 लाख क्विंटल गन्ने की हुई पेराई

मिल के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024-25 के पिराई सत्र में करनाल शुगर मिल ने 98.55 प्रतिशत क्षमता उपयोग के साथ 48.10 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की। इस दौरान 4.55 लाख क्विंटल रिफाइंड चीनी का उत्पादन किया गया।

मिल ने पावर टरबाइन की निर्धारित क्षमता का इस्तेमाल करते हुए बिजली उत्पादन के क्षेत्र में भी प्रदर्शन किया। सत्र के दौरान मिल ने 22.67 करोड़ रुपये की बिजली बेची।

1976 में 1250 TCD क्षमता से हुई थी शुरुआत

करनाल कोऑपरेटिव शुगर मिल की स्थापना वर्ष 1976 में 116 एकड़ भूमि पर की गई थी। उस समय मिल की शुरुआती पेराई क्षमता 1250 TCD यानी प्रतिदिन 1250 टन गन्ने की पेराई थी। मिल का पहला पेराई सत्र 1976-77 में शुरू हुआ था।

गन्ने की खेती बढ़ने के साथ मिल की क्षमता का भी विस्तार किया गया। वर्ष 1991-92 में इसकी पेराई क्षमता 1250 TCD से बढ़ाकर 2200 TCD की गई।

2021 में क्षमता बढ़कर हुई 3500 TCD

गन्ना किसानों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री स्वर्ण जयंती परियोजना के तहत वर्ष 2021 में मिल का विस्तार किया। इसके बाद मिल की पेराई क्षमता बढ़कर 3500 TCD हो गई।

मिल में अत्याधुनिक तकनीक के जरिए सल्फर-मुक्त रिफाइंड चीनी का उत्पादन किया जा रहा है। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े निर्धारित मानकों का पालन करने का दावा किया गया है।

चीनी के साथ बिजली और दूसरे उत्पादों का भी उत्पादन

करनाल शुगर मिल में चीनी के अलावा शीरा, बिजली, प्रेस मड और खोई जैसे उप-उत्पादों का भी उत्पादन और बिक्री की जाती है। मिल में 18 मेगावाट सह-उत्पादन क्षमता के साथ 3500 TCD का नया रिफाइंड शुगर प्लांट स्थापित किया गया है।

मिल प्रबंधन के मुताबिक नए प्लांट की स्थापना और तकनीकी सुधारों के बाद मिल पिछले तीन वर्षों से नकद लाभ की स्थिति में है। प्रबंधन ने किसानों को गन्ने के भुगतान और मिल की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने पर भी जोर दिया है।