कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन (Delimitation) से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा के लिए जल्द से जल्द सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। यह इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को लिखा गया उनका चौथा पत्र है। खड़गे ने जोर दिया कि संसद में कोई भी नया संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश करने से पहले सभी राजनीतिक दलों और संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श होना चाहिए।
परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक की मांग
शुक्रवार को लिखे पत्र में खड़गे ने कहा कि संसद का मॉनसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था, लेकिन इसके बाद दो महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद संसद के दोनों सदनों की अगली बैठक को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
उन्होंने सरकार से मॉनसून सत्र की स्थिति औपचारिक रूप से स्पष्ट करने और परिसीमन से संबंधित किसी भी नए प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से पहले सर्वदलीय बैठक आयोजित करने का आग्रह किया।
11 अप्रैल से लगातार उठा रहे हैं मुद्दा
खड़गे के मुताबिक, उन्होंने पहली बार 11 अप्रैल को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर परिसीमन से जुड़े किसी भी संवैधानिक संशोधन विधेयक को पेश करने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी। हालांकि, उनके अनुसार, सरकार ने इस मांग पर अमल नहीं किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने 14 अप्रैल की देर शाम विधेयकों को सार्वजनिक किया और 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाया। इसके बाद 17 अप्रैल को संबंधित विधेयक लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। खड़गे ने 16 जुलाई और 27 अगस्त को भी इस विषय पर प्रधानमंत्री को पत्र लिखे थे।
‘परिसीमन पर आम सहमति जरूरी’
खड़गे ने चेतावनी दी कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक सुधारों पर सरकार को एकतरफा रुख अपनाने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों और क्षेत्रीय हितधारकों को प्रस्तावित विधेयकों का अध्ययन करने और अपनी राय रखने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
कांग्रेस ने सरकार से जल्दबाजी में विशेष संसदीय सत्र बुलाने के बजाय संवाद और सहमति के आधार पर आगे बढ़ने की अपील की है। पार्टी का कहना है कि परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर व्यापक चर्चा के बाद ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए।
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