कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर प्रस्तावित परिसीमन को लेकर अपनी पुरानी मांगें दोहराई हैं। उन्होंने कहा कि इस अहम मुद्दे पर कोई भी प्रस्ताव संसद में लाने से पहले सभी राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों को उसका विस्तृत अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।
विशेष सत्र की संभावना के बीच पत्र
खरगे ने यह पत्र केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बुधवार रात दिए गए उस बयान के बाद लिखा है, जिसमें उन्होंने संसद का एक और विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना के संकेत दिए थे। खरगे ने कहा कि ऐसी स्थिति में सरकार को परिसीमन जैसे व्यापक प्रभाव वाले मुद्दे पर जल्दबाजी से बचना चाहिए।
उन्होंने अपने 16 जुलाई के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी प्रधानमंत्री से सर्वदलीय बैठक बुलाने और राजनीतिक दलों को प्रस्ताव का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय देने का आग्रह किया था।
खरगे की तीन प्रमुख मांगें
कांग्रेस अध्यक्ष ने परिसीमन को लेकर तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखी जाए।
राज्यों को लोकसभा में मौजूदा सीट आवंटन अगले 25 वर्षों तक कायम रखा जाए।
2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू किया जाए।
‘बुलडोजर चलाने की कोशिश न हो’
खरगे ने कहा कि परिसीमन देश के राजनीतिक ढांचे और राज्यों के प्रतिनिधित्व पर दूरगामी असर डाल सकता है। इसलिए सभी पक्षों को पर्याप्त समय और अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि 16-17 अप्रैल 2026 की तरह दोबारा ‘बुलडोजर चलाने’ की कोशिश न की जाए।
गौरतलब है कि 17 अप्रैल को लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित 131वें संविधान संशोधन विधेयक को दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका था। विधेयक के पक्ष में 298 वोट, जबकि विपक्ष में 230 वोट पड़े थे।
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