किशनगंज। लोक आस्था के महान पर्व छठ के नजदीक आते ही किशनगंज शहर की जीवनदायिनी रमजान नदी की सफाई और इसके जलप्रवाह को दुरुस्त करने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। नगर परिषद के मुख्य पार्षद इंद्रदेव पासवान ने इस संबंध में जिला पदाधिकारी (DM) को एक गंभीर पत्र लिखा है, जिसमें नदी के बंद पड़े पुराने मुहाने को तत्काल खुलवाने की पुरजोर मांग की गई है ताकि पर्व के दौरान व्रतियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
वर्षों से बंद मुहाने को खोलने की गुहार
मुख्य पार्षद ने अपने पत्र में इस बात पर विशेष जोर दिया है कि रमजान नदी के उस ऐतिहासिक मुहाने को तुरंत खोला जाए जो पहले डॉक नदी से जुड़ा हुआ करता था। उनके अनुसार, यह मुहाना लंबे समय से बंद पड़ा है, जिसके कारण नदी का स्वाभाविक जल प्रवाह रुक गया है। यदि समय रहते इस मुहाने को फिर से चालू कर दिया जाए, तो नदी में पानी का स्तर और उसका बहाव दोनों बेहतर हो जाएंगे, जिससे छठ घाटों पर अर्घ्य देने वाले व्रतियों को बड़ी राहत मिलेगी।
शहर की लाइफलाइन और जलस्तर की समस्या
किशनगंज शहर के मध्य से गुजरने वाली रमजान नदी को इस क्षेत्र की लाइफलाइन कहा जाता है। हालांकि जल संसाधन विभाग द्वारा इस नदी के सौंदर्यीकरण और गाद निकालने (सिल्ट क्लीयरेंस) का कार्य पहले कराया जा चुका है, फिर भी वर्तमान में नदी का जलस्तर चिंताजनक रूप से काफी नीचे चला गया है। मुख्य पार्षद ने छठ घाटों के किए गए औचक निरीक्षण के दौरान इस बदतर स्थिति को अपनी आंखों से देखा है।
नालियों के गंदे पानी से फैल रही दुर्गंध
नदी में जलस्तर की भारी कमी और शहर की तमाम नालियों का गंदा पानी सीधे रमजान नदी में मिलने के कारण गंभीर समस्याएं पैदा हो गई हैं। पानी का पर्याप्त प्राकृतिक प्रवाह न होने की वजह से नालियों का गंदा पानी घाटों के आसपास ही जमा हो रहा है, जिससे वहां भीषण दुर्गंध फैल रही है। इस अस्वच्छ और दूषित वातावरण के कारण छठ व्रतियों को नदी के घाटों पर स्नान करने तथा अस्ताचलगामी एवं उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की उम्मीद
मुख्य पार्षद इंद्रदेव पासवान ने जिला प्रशासन से यह पुरजोर आग्रह किया है कि महापर्व छठ के पवित्र और सीमित दिनों को देखते हुए युद्ध स्तर पर कदम उठाए जाएं। यदि समय रहते रमजान नदी का बंद मुहाना खोलकर पानी के प्रवाह को सुचारू नहीं किया गया, तो श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंच सकती है। प्रशासन की ओर से तुरंत हस्तक्षेप से ही नदी का पानी स्वच्छ हो सकेगा और पर्व के दौरान शहरवासियों व व्रतियों के लिए एक निर्मल वातावरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।

