पटना। किशनगंज के तत्कालीन एसडीपीओ (SDPO) गौतम कुमार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे गौतम कुमार शुक्रवार को एक बार फिर आर्थिक अपराध इकाई (EOW) के पटना स्थित कार्यालय पहुंचे। इस बार मामला केवल पुरानी संपत्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि जांच में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में एक नई और बेनामी संपत्ति का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

​सिलीगुड़ी में मिला बेनामी आशियाना

​EOW की गहन जांच में यह तथ्य सामने आया है कि गौतम कुमार ने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी (बागडोगरा) में एक आलीशान दो मंजिला मकान बनवा रखा है। दिलचस्प बात यह है कि इस मकान का पंजीकरण उनकी एक महिला मित्र, शगुफ्ता शमीम के नाम पर कराया गया था। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, इस संपत्ति का निबंधन जुलाई 2025 में बागडोगरा निबंधन कार्यालय में किया गया था। हालांकि, जांच एजेंसी का स्पष्ट दावा है कि कागजों पर नाम भले ही किसी और का हो, लेकिन इस संपत्ति का वास्तविक निवेश और मालिकाना हक गौतम कुमार का ही है।

​निलंबन के बाद बढ़ी शिकंजा

​बता दें कि भ्रष्टाचार के इस मामले में सोमवार को भी गौतम कुमार से करीब चार घंटे तक कड़ी पूछताछ की गई थी। उस दौरान मिले ठोस सबूतों और आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति मिलने के प्रारंभिक प्रमाणों के आधार पर बिहार सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें पद से निलंबित कर दिया था। निलंबन के ठीक बाद सिलीगुड़ी वाली संपत्ति का सुराग मिलना उनकी स्थिति को और नाजुक बना रहा है।

​दस्तावेजों के साथ दोबारा तलब

​शुक्रवार की पूछताछ के लिए EOW ने गौतम कुमार को कड़े निर्देश दिए थे कि वे संपत्ति से जुड़े तमाम मूल दस्तावेजों के साथ पेश हों। जांच अधिकारी शगुफ्ता शमीम के नाम पर खरीदी गई जमीन और मकान के निर्माण में लगे पैसों के स्रोत के बारे में पूछताछ कर रहे हैं। सूत्रों का मानना है कि इस पूछताछ के बाद कुछ अन्य रसूखदारों और सहयोगियों के नाम भी सामने आ सकते हैं, जिन्होंने इस अवैध कमाई को छिपाने में उनकी मदद की।
​EOW की इस सक्रियता ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि गौतम कुमार इन संपत्तियों का क्या बचाव पेश करते हैं या फिर भ्रष्टाचार की यह जांच उन्हें जेल की सलाखों के पीछे ले जाती है।