कुरुक्षेत्र। जिला एवं सत्र न्यायालय कुरुक्षेत्र ने करीब 9 साल पुराने एक बेहद जघन्य और सनसनीखेज मामले में अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इलाके के बहुचर्चित भेड़ लूटकांड और तीन लोगों की बेरहमी से हत्या करने के मामले में गिरोह के सभी 9 आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने सभी दोषियों पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। सजा पाने वाले इन अपराधियों में एक महिला भी शामिल है और ये सभी मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं।

क्या था पूरा मामला और कैसे दी गई वारदात को क्रूर शक्ल?

यह खौफनाक घटना मई 2018 की है। पिंडारसी रेलवे स्टेशन के पास रहने वाले ईशम सिंह ने पुलिस को दिए अपने बयानों में बताया था कि उनके भाई राजा राम और अर्जुन, अपने एक अन्य साथी संदीप के साथ रेलवे स्टेशन के पास डेरा डालकर भेड़-बकरियां चराने का काम करते थे। उनके पास करीब 500 भेड़ें और अन्य मवेशी थे, जिनकी वे रात में रखवाली करते थे।

22 मई 2018 की सुबह अचानक सूचना मिली कि रेलवे स्टेशन के पास पटरियों पर ट्रेन की चपेट में आने से बड़ी संख्या में भेड़ें मृत और घायल अवस्था में पड़ी हैं। जब मौके पर जाकर देखा गया, तो मंजर बेहद खौफनाक था। वारदात स्थल के पास खेतों में बने गड्ढों से राजा राम और अर्जुन के शव बरामद हुए, जबकि संदीप गंभीर रूप से घायल तड़पता हुआ मिला, जिसने बाद में दम तोड़ दिया। बदमाशों की क्रूरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने तीनों पीड़ितों के हाथ-पैर रस्सियों से बांध दिए थे और उनके मुंह पर प्लास्टिक की टेप चिपका दी थी ताकि वे चिल्ला न सकें।

60 भेड़ें ट्रेन से कटीं, 250 लूट ले गए थे बदमाश

जांच में यह साफ हुआ कि बदमाशों का मुख्य मकसद मवेशियों को लूटना था। लूटपाट के दौरान जब भेड़ें भागने लगीं, तो वे रेलवे ट्रैक पर आ गईं। उसी दौरान वहां से गुजरी एक ट्रेन की चपेट में आने से करीब 60 भेड़ों की कटकर मौत हो गई और 17 भेड़ें जख्मी हो गईं। इसके बावजूद, हमलावर वहां से लगभग 250 भेड़ों को जबरन लूटकर फरार होने में कामयाब रहे थे। घटना के बाद मुस्तैद हुई पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 30 मई 2018 को राजस्थान के धौलपुर जिले से इन सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।

9 साल चला लंबा कानूनी संघर्ष, ऐसे मिला न्याय

जिला न्यायालय में यह मामला लगभग 9 साल तक चला। जिला न्यायवादी जयमल ने बताया कि अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मामले की गंभीरता, गवाहों के बयानों और पुख्ता सबूतों को आधार मानते हुए सभी 9 आरोपियों को आईपीसी की धारा 396 (डकैती के दौरान हत्या) के तहत दोषी पाया।
अदालत ने हरकेश उर्फ राकेश, फोकरिया, यादराम उर्फ बेरा, रामलाल, बन्नी, मुकेश, कमलेश, रमेश कुमार और महिला मीरा को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही सभी पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में दोषियों को 3 महीने की अतिरिक्त कड़ी जेल काटनी होगी। इसके अलावा, इन्हें 5-5 साल की अतिरिक्त कैद और 1-1 हजार रुपये के जुर्माने की सजा भी अलग से सुनाई गई है। इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है।

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