अमित पाण्डेय, खैरागढ़। खैरागढ़ जिले में सरकारी शराब दुकानों के संचालन और उनके आसपास की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। खैरागढ़ और छुईखदान की शराब दुकानों से जुड़े दो वीडियो सामने आए हैं, इनमें कहीं एक युवक की पिटाई होती दिखाई दे रही है, तो कहीं पर्स चोरी के शक में एक युवक को लोग पीटते नजर आ रहे हैं। इन वीडियो ने पुलिस और आबकारी विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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वायरल वीडियो में एक युवक के साथ मारपीट होती दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि पर्स चोरी के शक में युवक को पीटा गया। हालांकि, केवल शक के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। कानून के मुताबिक, चोरी की आशंका होने पर पुलिस को सूचना देकर जांच करानी चाहिए, न कि भीड़ खुद फैसला सुनाकर किसी के साथ मारपीट करे। ऐसी घटनाएं न सिर्फ कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती हैं, बल्कि मौके पर मौजूद लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता पैदा करती हैं।

पहले भी उठते रहे हैं शराब दुकानों पर सवाल

खैरागढ़ जिले में शराब दुकानों को लेकर विवाद पहली बार सामने नहीं आए हैं। इससे पहले भी मारपीट और ओवररेटिंग यानी निर्धारित कीमत से अधिक में शराब बेचने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। जिले में नकली शराब मिलने के मामले भी सामने आ चुके हैं और इस तरह के मामलों में अधिकारियों पर कार्रवाई तथा निलंबन की जानकारी भी सामने आई थी।

इन घटनाओं के बाद शराब दुकानों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने के दावे किए गए थे। ऐसे में अब खैरागढ़ और छुईखदान से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि पहले की घटनाओं से विभाग ने क्या सबक लिया और दुकानों के आसपास की स्थिति सुधारने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए गए?

आबकारी विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ शराब बेचने तक?

आबकारी विभाग सरकारी शराब दुकानों के संचालन और नियमों के पालन की निगरानी करता है। ऐसे में विभाग से सवाल है कि दुकानों के आसपास की स्थिति की समीक्षा की गई या नहीं? मारपीट, ओवररेटिंग और नकली शराब जैसे मामलों के बाद निगरानी व्यवस्था में क्या बदलाव किए गए? सुरक्षा के जिन इंतजामों की बात कही गई थी, उनकी मौजूदा स्थिति क्या है?वहीं, पुलिस की गश्त और त्वरित कार्रवाई पर भी सवाल हैं। क्या इन स्थानों पर नियमित पेट्रोलिंग होती है? क्या पहले भी इस तरह की घटनाओं की शिकायतें मिली थीं?

वायरल वीडियो के आधार पर जांच करेगी पुलिस

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रूपेश कुमार डांडे ने बताया कि अब तक इस संबंध में कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उनके मुताबिक, वायरल वीडियो की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है। वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जाएगी और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी शराब दुकानों के आसपास ऐसी घटनाएं क्यों सामने आ रही हैं और इन्हें रोकने के लिए जिम्मेदार विभाग क्या कदम उठाते हैं।

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