दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने चलती कार से वर्चुअल सुनवाई में पेश होने वाले एक वकील पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वर्चुअल सुनवाई की सुविधा का इस्तेमाल कोर्टरूम की मर्यादा से समझौता करते हुए या न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालने के लिए नहीं किया जा सकता। जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अदालत को एक दिन में 70 से अधिक मामलों पर सुनवाई करनी पड़ती है। ऐसे में सुनवाई के दौरान बैकग्राउंड में होने वाला शोर और लगातार होने वाली हलचल न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालती है।

वर्चुअल सुनवाई में भी मर्यादा जरूरी

हाईकोर्ट ने कहा कि तकनीक ने अदालत की कार्यवाही में वर्चुअल माध्यम से शामिल होने की सुविधा जरूर दी है, लेकिन इसका इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। अदालत की कार्यवाही के दौरान ऐसा माहौल होना जरूरी है, जिससे सुनवाई बिना किसी व्यवधान के हो सके। कोर्ट ने वकील के चलती कार से वर्चुअल सुनवाई में शामिल होने के तरीके को गंभीरता से लेते हुए 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।

2025 के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमों का भी दिया हवाला

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में उच्च न्यायालय के इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम, 2025 का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि इन नियमों में स्पष्ट किया गया है कि वकीलों को असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर और अदालत की अनुमति के बिना वाहन से न्यायिक कार्यवाही में शामिल होने से बचने का प्रयास करना चाहिए। अदालत ने कहा कि वर्चुअल माध्यम से सुनवाई में शामिल होने की सुविधा का उद्देश्य कार्यवाही को सुगम बनाना है। इसका इस्तेमाल ऐसे तरीके से नहीं किया जाना चाहिए, जिससे अदालत की कार्यवाही में व्यवधान पैदा हो या उसकी गरिमा प्रभावित हो।

 ‘नियमों का उल्लंघन है वकील का आचरण’

दिल्ली हाईकोर्ट ने चलती कार से वर्चुअल सुनवाई में पेश होने वाले वकील नचिकेता गोयल के आचरण को अदालत के नियमों का उल्लंघन माना है। कोर्ट ने कहा कि वर्चुअल माध्यम से पेश होने वाले वकीलों के लिए ऐसा वातावरण होना जरूरी है, जो अदालत के उचित कामकाज के अनुकूल हो। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह आवश्यकता केवल प्रक्रियात्मक नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वकील जब वर्चुअली पेश हों, तब भी ऐसी जगह से कार्यवाही में शामिल हों जहां अदालत की सुनवाई सुचारू रूप से चल सके।

असाधारण परिस्थिति नहीं थी

कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में वकील के पास वाहन से सुनवाई में शामिल होने की कोई असाधारण परिस्थिति नहीं थी। ऐसे में उनका आचरण संबंधित नियमों के अनुरूप नहीं था। इसके बाद हाईकोर्ट ने वकील नचिकेता गोयल को दिल्ली हाईकोर्ट कानूनी सेवा समिति (DHCLSC) के पास 1 लाख रुपये जमा कराने का आदेश दिया।

NHAI से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान आदेश

हाईकोर्ट ने यह आदेश भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के खिलाफ साउथ इंडियन बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की ओर से शुरू की गई प्रवर्तन कार्यवाही की सुनवाई के दौरान पारित किया। इससे पहले अदालत ने कहा था कि वर्चुअल सुनवाई की सुविधा कोर्टरूम की मर्यादा या न्यायिक कार्यवाही के सुचारू संचालन की कीमत पर नहीं हो सकती।

कोर्ट ने जताई कड़ी आपत्ति

सुनवाई के दौरान अदालत ने वकील के इस तरीके पर कड़ी आपत्ति जताई। कोर्ट ने कहा कि वर्चुअल सुनवाई की सुविधा का इस्तेमाल भी ऐसे तरीके से किया जाना चाहिए, जिससे न्यायिक कार्यवाही की गरिमा और सुचारू संचालन प्रभावित न हो। अदालत के मुताबिक, उच्च न्यायालय के इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम, 2025 में भी वकीलों से अपेक्षा की गई है कि वे असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर और अदालत की अनुमति के बिना वाहन से कार्यवाही में शामिल होने से बचें। कोर्ट ने वकील नचिकेता गोयल को 1 लाख रुपये का जुर्माना दिल्ली उच्च न्यायालय विधि सेवा समिति (DHCLSC) के पास जमा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने राशि एक सप्ताह के भीतर जमा करने को कहा है।

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