दिल्ली में पुलिस (Delhi Police) और वकीलों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। शाहदरा थाने में पुलिस अधिकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार, गाली-गलौज और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में 15 से 20 वकीलों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने के बाद वकीलों ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विरोध में दिल्ली की सभी जिला अदालतों के वकील आज हड़ताल पर रहेंगे। हड़ताल के मद्देनजर जिला अदालतों में न्यायिक कामकाज प्रभावित रहने की संभावना है।
शाहदरा थाने में क्या हुआ था?
यह पूरा मामला 24 अक्टूबर की एक घटना से जुड़ा है। आरोप है कि शाहदरा थाने में एक वकील ने कथित तौर पर थाना प्रभारी (SHO) का हाथ खींचने की कोशिश की थी। इस दौरान पुलिस अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार और गाली-गलौज किए जाने का भी आरोप है। बताया जा रहा है कि यह घटना थाने में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 15 से 20 वकीलों पर पुलिस अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार करने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में केस दर्ज किया है।
पुलिस के खिलाफ वकीलों की हड़ताल
पुलिस की कार्रवाई के विरोध में वकीलों ने हड़ताल का आह्वान किया है। दिल्ली की सभी जिला अदालतों के वकील आज कामकाज से दूर रहकर विरोध दर्ज कराएंगे। हड़ताल के कारण अदालतों में सुनवाई और अन्य न्यायिक प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है। वकीलों के विरोध और पुलिस की कार्रवाई के बीच यह विवाद अब व्यापक रूप लेता दिखाई दे रहा है। हालांकि, वकीलों की ओर से रखे गए पक्ष और उनकी प्रमुख मांगों का विस्तृत विवरण सामने आना बाकी है।
अदालत परिसर में हेड कांस्टेबल को रोकने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, 24 अक्टूबर को गांधी नगर के एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को सूचना मिली थी कि हेड कांस्टेबल अमित मलिक को कड़कड़डूमा अदालत परिसर में वकीलों के एक समूह ने रोक लिया है। शिकायत के अनुसार, वकीलों ने 21 अक्टूबर को दर्ज एक मामले में आरोपी को गिरफ्तार नहीं किए जाने को लेकर हेड कांस्टेबल से सवाल-जवाब किए। इसी दौरान बहस बढ़ने पर पुलिसकर्मियों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया। हालांकि, बाद में हेड कांस्टेबल अमित मलिक को जाने दिया गया, जिसके बाद वह थाने लौट आए।
ACP की शिकायत पर BNS की चार धाराओं में केस
26 अक्टूबर को एसीपी मनस्वी वशिष्ठ की ओर से शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया। पुलिस ने BNS की धारा 221, 132, 224 और 3(5) लगाई हैं। इन धाराओं का संबंध लोक सेवक के काम में बाधा डालने, कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल प्रयोग करने, लोक सेवक को चोट पहुंचाने की धमकी देने और समान मंशा से किए गए कृत्य से है। मामले में 15 से 20 वकीलों पर आरोप लगाए गए हैं। आरोपों की पुष्टि और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का निर्धारण जांच के आधार पर होगा।
रिश्वत लेने का आरोप लगाकर थाने पहुंचे वकील
शिकायत के अनुसार, 24 अक्टूबर को दोपहर करीब 2:30 बजे वकील अमूल्य, शाहदरा बार एसोसिएशन के सदस्यों समेत लगभग 15 से 20 वकीलों के साथ शाहदरा थाने पहुंचे। आरोप है कि वे थाना प्रभारी (SHO) के कमरे में गए, जहां उन्होंने सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) और SHO के साथ दुर्व्यवहार किया। शिकायत में कहा गया है कि वकीलों ने पुलिस पर 21 अक्टूबर को दर्ज मामले के आरोपी को रिहा करने के लिए रिश्वत लेने का आरोप लगाया। इस पर ACP ने उन्हें शांत करने का प्रयास किया और भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है तथा कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। हालांकि, शिकायत के मुताबिक, इसके बावजूद वकीलों ने हंगामा जारी रखा।
बार एसोसिएशन के सचिव पर भी आरोप
पुलिस की शिकायत में कड़कड़डूमा बार एसोसिएशन के सचिव पर भी आक्रामक व्यवहार करने और थाना प्रभारी को कथित तौर पर ‘भ्रष्ट’ कहने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के अनुसार, बहस के दौरान एक वकील ने SHO को थाने के भीतर पीटने की धमकी दी। आरोप है कि जब SHO ने इसका विरोध किया तो संबंधित वकील ने उनका हाथ खींचने की कोशिश की। स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए पुलिसकर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि एक अन्य वकील ने पुलिस अधिकारियों को गाली दी और धमकी दी। इन आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होनी है।
BNS की चार धाराओं में दर्ज है मामला
इस घटनाक्रम के संबंध में गांधी नगर के ACP मनस्वी वशिष्ठ की शिकायत पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 221, 132, 224 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं का संबंध लोक सेवक के काम में बाधा डालने, उसके कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल प्रयोग करने, लोक सेवक को चोट पहुंचाने की धमकी देने और समान मंशा से किए गए कृत्य से है। पुलिस के अनुसार, विवाद की शुरुआत 24 अक्टूबर को कड़कड़डूमा अदालत परिसर में हेड कांस्टेबल अमित मलिक को वकीलों के एक समूह द्वारा रोके जाने की घटना से भी जुड़ी है। वकीलों ने कथित तौर पर 21 अक्टूबर के मामले में आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने पर सवाल उठाए थे।
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