लखनऊ. राजधानी के बख्शी का तालाब (बीकेटी) इलाके में किसान पथ पर फॉर्मेलिन से भरे टैंकर के पलटने के 36 घंटे बाद भी यातायात प्रभावित है. हाईवे पर बैरिकेडिंग लगी है और वाहनों को वापस लौटाया जा रहा है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब 15 से 20 हजार की आबादी इससे प्रभावित हुई है. आसपास के लोगों ने आंखों में जलन, उल्टी जैसा महसूस होने और सांस लेने में परेशानी की शिकायत की है.
टायर फटने से पलटा केमिकल से भरा टैंकर
सोमवार 26 अक्टूबर शाम करीब 6:30 बजे टैंकर हरदोई के संडीला से गुडंबा क्षेत्र की एक फैक्ट्री में फॉर्मेलिन लेकर जा रहा था. मानपुर-बाना के पास टायर फटने से टैंकर अनियंत्रित होकर पलट गया. इसके बाद केमिकल का रिसाव होने लगा. सूचना मिलते ही बीकेटी पुलिस मौके पर पहुंची और आसपास बैरिकेडिंग कर रास्ता बंद कर दिया.
NDRF-SDRF की टीमों ने संभाला मोर्चा
हादसे के बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और फायर सर्विस की टीमें मौके पर पहुंचीं. केमिकल के रिसाव को नियंत्रित करने में कई घंटे लगे. स्थानीय लोगों का आरोप है कि शुरुआती करीब तीन घंटे तक मुख्य रूप से लोगों को घटनास्थल से दूर रखने की कार्रवाई होती रही. रिसाव को रोकने के लिए मिट्टी डालने की भी जानकारी सामने आई. हालांकि, राहत और बचाव कार्य के बावजूद लोगों की चिंता बनी रही.
हाईवे बंद, लोग जोखिम लेकर लौट रहे
मंगलवार को भी हाईवे पर बैरिकेडिंग लगी रही. वाहनों को वापस लौटना पड़ा. कुछ लोग गलत दिशा से निकलते दिखाई दिए, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ गया. स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब दो किलोमीटर के दायरे में लोगों ने जलन और दूसरी परेशानियां महसूस कीं. इलाके में मेडिकल टीम भी तैनात की गईं.
इसे भी पढ़ें- UP MLC चुनाव में घमासान: मेरठ में BJP का क्लीन स्वीप, आगरा-गोरखपुर में बवाल
आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर उठे सवाल
घटना के बाद फैक्ट्री संचालक के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है. मॉक ड्रिल में आपदा से निपटने की तैयारियों और वास्तविक हादसे में लगे समय को लेकर भी चर्चा हो रही है. सवाल है कि क्या रासायनिक आपदा से निपटने के इंतजाम पर्याप्त थे. फिलहाल, लोगों की सुरक्षा, केमिकल के प्रभाव और हाईवे को पूरी तरह खोलने को लेकर स्पष्ट जानकारी का इंतजार है.

